संकल्पों का बजट: विनिर्माण व अवसंरचना को बड़ा प्रोत्साहन, आयकर दरें यथावत

नई  दिल्ली : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 53,47,315 करोड़ रुपये का बजट पेश किया जिसमें अर्थव्यवस्था को वैश्विक चुनौतियों के मुकाबले के लिए मजबूत करने के साथ-साथ विकसित भारत की ओर अग्रसर करने के लिए विनिर्माण, आर्थिक और सामाजिक अवसंरचना विकास के लिए 17,14,523 करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय का लक्ष्य रखा गया है।

बजट में व्यक्तिगत आयकर की दरों में कोई राहत नहीं दी गयी है, लेकिन उद्योगों पर न्यूनतम वैकल्पिक आयकर (मैट) की दर को 15 प्रतिशत से घटाकर 14 प्रतिशत कर दिया गया है। बजट में निवेशकों और आयातकों के लिए प्रक्रिया और अनुपालन आसान बनाने के विस्तृत उपायों की घोषणा की गयी है।

वित्त मंत्री ने एक घंटे 25 मिनट के अपने भाषण में बजट में पूंजीगत व्यय बढ़ाने के बावजूद राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.3 प्रतिशत तक सीमित रखने का लक्ष्य रखा है। चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा बजट अनुमान के 4.5 प्रतिशत की तुलना में 4.4 प्रतिशत रहा है।

वित्त मंत्री के बजट भाषण के बाद शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखी गयी और एक समय बीएसई का सेंसेक्स 2300 अंक तक लुढ़क गया था लेकिन बाद में इसने काफी हद तक वापसी की।

वित्त मंत्री ने चालू वित्त वर्ष से ऋण को जीडीपी की तुलना में सीमित करने की योजना के तहत ऋण-जीडीपी अनुपात को 2030-31 तक 50 प्रतिशत के आसपास रखने का लक्ष्य रखा है जिसके 2026-27 में 55.6 प्रतिशत पर रहने का अनुमान है। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकारी कर्ज कम होने से प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए ऋण का उपलब्धता बढ़ेगी, सरकार पर ब्याज भुगतान कम होगा और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।

वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट को स्वीकार करने की घोषणा की और कहा कि केंद्र की विभाज्य प्राप्तियों में राज्यों का हिस्सा 41 प्रतिशत बना रहेगा।

उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की वृद्धि दर सात प्रतिशत के दायरे में बनी हुई है जिससे सरकार विकास और कल्याण के लिए संसाधनों को जुटाने में सफल रही है। उन्होंने कहा कि भारत को विश्व बाजार से जुड़े रहना है ताकि देश निर्यात बाजार और विदेशी पूंजी तथा प्रौद्योगिकी का लाभ हासिल करता रहे।

उन्होंने सरकार में विश्वास बनाये रखने के लिए जनता का आभार व्यक्त करते हुए कि हमारा लक्ष्य लोगों की आकांक्षाओं को मूर्त रूप देना है और आर्थिक वृद्धि को युवाओं, किसानों, गरीबों, महिलाओं और समाज के अन्य जरूरतमंद वर्गों तक पहुंचाना है।

केंद्र सरकार के नये कार्यालय क्षेत्र कर्तव्य भवन में तैयार इस पहले बजट को पेश करते हुए वित्त मंत्री ने इसे युवाओं से प्रेरित बताया और कहा कि इस बजट को तैयार करने में जनता से बहुमूल्य सुझाव प्राप्त हुए। उन्होंने इस बजट को सरकार के तीन कर्तव्यों पर केंद्रित बजट बताते हुए कहा कि सरकार का पहला कर्तव्य आर्थिक वृद्धि को बढ़ाना, दूसरा कर्तव्य आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए लोगों को समर्थ बनाना और तीसरा कर्तव्य सबका साथ सबका विकास के अनुरूप सामाजिक कल्याण की योजनाओं को आगे बढ़ाना है।

वित्त मंत्री ने नीतियों और कार्यक्रमों में सुधार की सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए कहा कि गत अगस्त में प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस संबोधन के बाद से वस्तु एवं सेवा कर सहित 350 से अधिक सुधारों को लागू किया जा चुका है। उन्होंने आर्थिक वृद्धि को तेज करने के लिए बायो फार्मा, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट, दुर्लभ खनिजों और कपड़ा जैसे क्षेत्रों को प्रोत्साहित करने के लिए नयी पहलों की घोषणा की।

उन्होंने 200 से अधिक पारंपरिक औद्योगिक संकुलों को पुनर्जीवित करने और चार नये आर्थिक क्षेत्रों के विकास का भी प्रस्ताव किया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पूंजीगत वस्तुओं के निर्माण में क्षमता निर्माण के लिए सार्वजनिक उपक्रमों की सहायता से दो स्थानों पर हाईटेक टूल रूम का निर्माण किया जायेगा जो कम लागत पर हाई प्रीसीजन कंपोनेंट का डिजाइन, परीक्षण और विनिर्माण करेंगे। विनिर्माण और बुनियादी ढांचा क्षेत्र के लिए उपकरण निर्माण के लिए भी एक योजना की घोषणा की गयी।

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