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पांच राज्यों को जल जीवन मिशन 2.0 के तहत 1,561 करोड़ रुपये जारी

नई दिल्ली। केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय के अनुसार उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा और मध्य प्रदेश को कुल 1,561.53 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इसमें उत्तर प्रदेश को 792.93 करोड़, छत्तीसगढ़ को 536.53 करोड़, मध्य प्रदेश को 154.02 करोड़, ओडिशा को 65.31 करोड़ और महाराष्ट्र को 12.74 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। कैबिनेट ने जल जीवन मिशन 2.0 के लिए कुल 8.69 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिसमें केंद्र का हिस्सा 3.59 लाख करोड़ रुपये है। यह 2019-20 में स्वीकृत 2.08 लाख करोड़ रुपये से 1.51 लाख करोड़ रुपये अधिक है। नया ढांचा सेवा वितरण आधारित मॉडल पर केंद्रित है, जिसमें स्थायी और सुरक्षित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए संरचनात्मक सुधार किए गए हैं। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को फंड जारी करने से पहले कई अनिवार्य शर्तें पूरी करनी होती हैं। इनमें सुधार आधारित एमओयू पर हस्ताक्षर, योजनाओं का ‘सुजलाम भारत’ जीआईएस लिंक्ड एसेट रजिस्ट्री में सत्यापन, तकनीकी अनुपालन प्रमाणपत्र, वित्तीय समायोजन और खर्च का मिलान शामिल है। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने हाल ही में राज्यों के मंत्रियों के साथ बैठक कर मिशन के रोडमैप पर चर्चा की थी। उन्होंने कहा था कि जल राज्य का विषय है और मिशन की सफलता राज्यों की जवाबदेही पर निर्भर करती है। जल जीवन मिशन 2.0 का लक्ष्य दिसंबर 2028 तक देश के सभी 19.36 करोड़ ग्रामीण घरों को नल से जल उपलब्ध कराना है। इसके लिए समयबद्ध योजनाएं, स्थायित्व और सामुदायिक भागीदारी पर जोर दिया जा रहा है। केंद्र सरकार ने बताया कि अब तक 12 राज्यों ने सुधार आधारित एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। मिशन के तहत ग्राम पंचायतों को तभी ‘हर घर जल’ घोषित किया जाएगा जब वहां संचालन और रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित हो जाएगी। केंद्र सरकार ने देश में ग्रामीण घरों तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाने के लिए जल जीवन मिशन 2.0 के तहत पांच राज्यों को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए फंड जारी कर दिए हैं। केंद्रीय कैबिनेट से 10 मार्च को मंजूरी मिलने के बाद यह राशि राज्यों को आवश्यक अनुपालन शर्तें पूरी करने पर दी गई है।

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