नेपाल के प्रधानमंत्री के नया भंसार नीति से सीमा पर तनाव

पटना।
बिहार के पूर्वी, पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी, दरभंगा, अररिया, सुपौल, पूर्णिमा जिलों में स्थित भारत-नेपाल सीमा पर वर्षों से चली आ रही सहज आवाजाही अब बदलती नजर आ रही है।नेपाल सरकार द्वारा 100 रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर कस्टम ड्यूटी को सख्ती से लागू करने के फैसले के बाद सीमावर्ती इलाकों में तनाव और असहजता बढ़ गई है। इसका असर सबसे ज्यादा आम लोगों और छोटे व्यापारियों पर पड़ रहा है।
- तराई क्षेत्र वासी भारतीय बाजार पर निर्भर
नेपाल के तराई क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए भारत आना-जाना रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा रहा है। नमक, तेल, दवा से लेकर अन्य जरूरी सामान के लिए वे भारतीय बाजारों पर निर्भर रहे हैं। लेकिन अब नए नियमों के कारण यह सहज व्यवस्था बाधित हो गई है।
सीमा पर अब पहले जैसी ढील नहीं दिख रही। कस्टम चेकपोस्ट से लेकर छोटे रास्तों तक निगरानी बढ़ा दी गई है। सुरक्षाकर्मी हर सामान की जांच कर रहे हैं और 100 रुपये से अधिक कीमत के सामान पर टैक्स लगाया जा रहा है। लाउडस्पीकर के जरिए भी लोगों को नियमों की जानकारी दी जा रही है।
बढ़ी झड़प और असंतोष
हाल ही में सप्तरी जिले के कुनौली बॉर्डर पर एक घटना ने हालात को और स्पष्ट कर दिया। भारत से सामान लेकर लौट रहे लोगों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हो गई। इस दौरान धक्का-मुक्की और तीखी बहस देखने को मिली, जो स्थानीय लोगों की नाराजगी को दर्शाती है।
सीमावर्ती इलाकों में परिवारिक और सांस्कृतिक संबंधों के चलते लोग अक्सर शादी, अंतिम संस्कार और त्योहारों के लिए सामान खरीदने भारत आते हैं। भारत और नेपाल के बाजारों में 20 से 45 प्रतिशत तक कीमत का अंतर होने के कारण लोग सस्ता सामान खरीदना पसंद करते हैं। नए नियमों ने इस परंपरा को प्रभावित किया है।सीमा शुल्क विभाग के महानिदेशक श्याम प्रसाद भंडारी ने कहा कि 100 रुपये की सीमा कोई नया प्रावधान नहीं है, बल्कि यह एक मौजूदा नियम है जिसे अब सख्ती से लागू किया जा रहा है।उन्होंने कहा, “हर साल ज्येष्ठ 15 (पिछले साल 29 मई) को जारी होने वाले सीमा शुल्क निर्देशों के अनुसार, ज़मीनी सीमा पार करने वाले व्यक्ति 100 रुपये तक का निजी सामान बिना किसी शुल्क के ला सकते हैं। इसका सीधा सा मतलब है कि इस मूल्य से अधिक का सामान कर योग्य है।
सीमा शुल्क विभाग के महानिदेशक श्याम प्रसाद भंडारी ने कहा कि 100 रुपये की सीमा कोई नया प्रावधान नहीं है, बल्कि यह एक मौजूदा नियम है जिसे अब सख्ती से लागू किया जा रहा है।उन्होंने कहा, “हर साल ज्येष्ठ 15 (पिछले साल 29 मई) को जारी होने वाले सीमा शुल्क निर्देशों के अनुसार, ज़मीनी सीमा पार करने वाले व्यक्ति 100 रुपये तक का निजी सामान बिना किसी शुल्क के ला सकते हैं। इसका सीधा सा मतलब है कि इस मूल्य से अधिक का सामान कर योग्य है।
अधिकारियों ने भी माना है कि इस फैसले का सीधा असर आम लोगों पर पड़ा है। पहले छोटे स्तर पर जो सामान बिना रोक-टोक आता था, अब वह जांच और टैक्स के दायरे में आ गया है। इससे सीमावर्ती लोगों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार के लिए राजस्व और नियंत्रण जरूरी है, लेकिन सीमावर्ती इलाकों की सामाजिक और आर्थिक जरूरतों को भी ध्यान में रखना होगा। फिलहाल, सख्ती और लोगों की जरूरतों के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
