गायघाट का बरगद गिरा तो रुक गई मोतिहारी-अरेराज की धड़कन

घंटों लगा जाम, लोगों ने दिखाई एकजुटता

मोतिहारी। पूर्वी चंपारण जिले के लिए लाइफलाइन माने जाने वाले मोतिहारी-अरेराज मुख्य मार्ग पर मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया जब गायघाट चौक के पास सड़क किनारे खड़ा दशकों पुराना बरगद का विशाल पेड़ अचानक धड़ाम से गिर पड़ा। पेड़ के गिरते ही पूरे मार्ग पर अफरातफरी का माहौल बन गया। यह मार्ग मोतिहारी को अरेराज, केसिया और नेपाल सीमा से जोड़ता है, इसलिए पेड़ गिरने से आवागमन पूरी तरह ठप हो गया। सैकड़ों वाहन दोनों तरफ लंबी कतारों में फंस गए। स्थानीय लोग और राहगीर आनन-फानन में पेड़ को काटकर हटाने में जुट गए।

घटना का क्रमवार विवरण

सुबह करीब 11:30 बजे की बात है। गायघाट चौक पर हमेशा की तरह चहल-पहल थी। दुकानदार अपनी दुकानें खोल रहे थे, स्कूल की बसें बच्चों को लेकर गुजर रही थीं, और किसान अपनी उपज लेकर मंडी की ओर जा रहे थे। गायघाट चौक पर लगा बरगद का पेड़ इलाके की पहचान था। बुजुर्ग बताते हैं कि यह पेड़ आजादी से पहले का है। इसकी घनी छाया में रोज दर्जनों लोग बैठकर सुस्ताते थे। चौक पर लगने वाले छोटे दुकानदारों के लिए यह पेड़ प्राकृतिक छतरी का काम करता था।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गिरने से कुछ सेकंड पहले पेड़ की शाखाओं से चरमराहट की आवाज आई। एक दुकानदार राजकिशोर प्रसाद ने बताया, “मैं चाय की दुकान पर ग्राहकों को चाय दे रहा था कि अचानक लगा जैसे धरती हिल रही हो। देखा तो बरगद का तना एक तरफ झुक रहा था। मैंने चिल्लाकर लोगों को हटने को कहा। 2 सेकंड बाद पूरा पेड़ सड़क पर आ गिरा।”

पेड़ गिरने की आवाज इतनी तेज थी कि एक किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। पेड़ सीधे सड़क के बीचों-बीच गिरा और उसकी मोटी शाखाएं दोनों तरफ फैल गईं। सड़क पूरी तरह बंद हो गई। उस समय सड़क से गुजर रही एक बाइक और एक ऑटो बाल-बाल बचे। बाइक सवार मोहन कुमार ने कहा, “अगर मैं 5 सेकंड पहले निकल जाता तो पेड़ मेरे ऊपर गिर जाता। भगवान का शुक्र है कि मैं बच गया।”

आवागमन ठप, घंटों लगा जाम

मोतिहारी-अरेराज मार्ग पर प्रतिदिन हजारों वाहनों का आवागमन होता है। यह मार्ग NH-28 से जुड़ता है और नेपाल के रक्सौल बॉर्डर तक जाने वाले व्यापारियों के लिए शॉर्टकट है। पेड़ गिरते ही दोनों तरफ 2-3 किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतार लग गई। ट्रक, बस, कार, बाइक, एंबुलेंस – सभी फंस गए।

सबसे ज्यादा परेशानी स्कूल जाने वाले बच्चों और मरीजों को हुई। एक एंबुलेंस मोतिहारी सदर अस्पताल से मरीज लेकर अरेराज जा रही थी, लेकिन पेड़ के कारण 45 मिनट तक फंसी रही। एंबुलेंस चालक संजय ने बताया, “मरीज की हालत गंभीर थी, पर रास्ता बंद था। लोगों ने मिलकर छोटा रास्ता बनाया तब कहीं जाकर एंबुलेंस निकाल पाए।”

स्कूली बच्चे भी देर से स्कूल पहुंचे। कई परीक्षार्थी भी जाम में फंस गए। स्थानीय दुकानदारों ने फंसे हुए लोगों को पानी और चाय पिलाकर राहत पहुंचाई।

लोगों में अफरातफरी, फिर एकजुटता

पेड़ गिरते ही इलाके में अफरातफरी मच गई। लोग इधर-उधर भागने लगे। कुछ लोग डर से दुकानें बंद करने लगे। अफवाह फैल गई कि भूकंप आ गया है। पर कुछ ही देर में लोग स्थिति समझ गए।

गायघाट चौक के युवाओं ने सबसे पहले पहल की। बबलू कुमार, पप्पू यादव, और राजा बाबू जैसे 15-20 युवक लाठी-डंडे और कुल्हाड़ी लेकर पेड़ काटने में जुट गए। दुकानदारों ने आरा मशीन मंगवाई। आसपास के घरों से रस्सी और हथौड़ा आया। महिलाओं ने फंसे हुए बच्चों और बुजुर्गों को पानी पिलाया।

स्थानीय समाजसेवी रामनरेश सिंह ने बताया, “यह पेड़ हम सबके लिए पूजनीय था। इसके गिरने का दुख तो है, पर लोगों ने जिस तरह एकजुट होकर रास्ता साफ किया, वह काबिल-ए-तारीफ है। जाति, धर्म सब भूलकर लोग काम में लग गए।”

प्रशासन की भूमिका और पेड़ हटाने का कार्य

घटना की सूचना मिलते ही तुरंत अरेराज थाना की पुलिस और राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची। थाना प्रभारी ने क्रेन और JCB मंगवाने के लिए फोन किया। पर क्रेन आने में देर थी, इसलिए लोगों ने इंतजार न करते हुए खुद ही काम शुरू कर दिया।

करीब 3 घंटे की मशक्कत के बाद दोपहर 2:30 बजे तक पेड़ की मोटी शाखाओं को काटकर सड़क से हटाया जा सका। तना इतना मोटा था कि उसे काटने में आरा मशीन की 4 ब्लेड टूट गईं। पेड़ का तना काटकर सड़क के किनारे रख दिया गया।

पुलिस ने यातायात बहाल करवाया। शाम 3 बजे तक जाम पूरी तरह खुल गया। थाना प्रभारी ने बताया, “समय रहते लोगों ने समझदारी दिखाई। अगर क्रेन का इंतजार करते तो रास्ता शाम तक बंद रहता। स्थानीय लोगों के सहयोग से स्थिति जल्दी संभली।”

जड़ कटने से पेड़ का संतुलन बिगड़ा

  1. सड़क निर्माण: गायघाट चौक के पास कुछ समय पहले सड़क चौड़ीकरण का काम हुआ था। उस दौरान पेड़ की जड़ों को नुकसान पहुंचा होगा। जड़ कटने से पेड़ का संतुलन बिगड़ गया।
  2. तेज हवा/बारिश: पिछले 2 दिनों से इलाके में हल्की बारिश और तेज हवा चल रही थी। गीली मिट्टी में जड़ कमजोर पेड़ को पकड़ नहीं पाई।
  3. उम्र: बुजुर्गों के अनुसार यह पेड़ 100 साल से ज्यादा पुराना था। उम्र के साथ पेड़ की पकड़ कमजोर हो जाती है।

वन विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “शहरों के बीच लगे पुराने पेड़ों की नियमित जांच होनी चाहिए। पेड़ अगर खोखला हो जाए तो उसे समय रहते काट देना चाहिए, वरना दुर्घटना हो सकती है।”

स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया और स्मृतियां

गायघाट चौक के 75 वर्षीय बुजुर्ग सुरेंद्र प्रसाद की आंखें पेड़ को गिरा देख नम हो गईं। उन्होंने कहा, “हम बचपन से इस पेड़ को देख रहे हैं। हमारी शादी इसी पेड़ के नीचे तय हुई थी। आज जब यह गिरा तो लगा जैसे परिवार का कोई सदस्य चला गया।”

चाय की दुकान चलाने वाली मीना देवी बोलीं, “गर्मी में इसी पेड़ की छाया में 50 लोग बैठ जाते थे। अब छाया चली गई, धूप लगेगी। पर शुक्र है कोई हताहत नहीं हुआ।”

युवा छात्र राहुल ने कहा, “हम लोग स्कूल से लौट रहे थे। पेड़ गिरने की आवाज सुनी तो डर गए। फिर सबने मिलकर रास्ता साफ किया। आज समझ आया कि एकता में कितनी ताकत है।”

यातायात और प्रशासन के लिए सबक

इस घटना से कई सबक मिलते हैं। पहला, मुख्य मार्गों पर लगे पुराने पेड़ों की समय-समय पर जांच जरूरी है। वन विभाग और PWD को मिलकर ऐसे पेड़ों की लिस्ट बनानी चाहिए जो कमजोर हो चुके हैं।
दूसरा, आपदा के समय स्थानीय लोगों की भूमिका सबसे अहम होती है। पुलिस और प्रशासन के पहुंचने से पहले ही लोगों ने रास्ता साफ कर दिया। अगर हर चौक-चौराहे पर ऐसे जागरूक नागरिक हों तो बड़ी दुर्घटनाएं टाली जा सकती हैं।
मोतिहारी-अरेराज मार्ग बंद होते ही पूरे इलाके का कनेक्शन टूट गया। भविष्य में ऐसी स्थिति के लिए छोटे संपर्क मार्गों को दुरुस्त रखना जरूरी है।

-गिरा पेड़, पर जगी एकता

गायघाट का बरगद गिर गया। उसके साथ इलाके की एक पहचान भी चली गई। पर इस घटना ने लोगों के बीच एकता, सहयोग और सूझबूझ की मिसाल भी कायम की। पेड़ काटने में लगे युवाओं, पानी पिलाती महिलाओं, और ट्रैफिक संभालती पुलिस – सभी ने मिलकर संकट को अवसर में बदल दिया।

अब गायघाट चौक पर बरगद नहीं है, पर लोगों की यादों में वह हमेशा रहेगा। शायद प्रशासन अब वहां एक नया पेड़ लगाए और उसकी देखभाल करे, ताकि आने वाली पीढ़ियों को भी छाया मिल सके।

फिलहाल मोतिहारी-अरेराज मार्ग पर वाहनों का आवागमन सामान्य हो गया है। पर गायघाट से गुजरने वाला हर व्यक्ति अब उस खाली जगह को देखकर एक पल जरूर रुकेगा – जहां कभी मोतिहारी का सबसे पुराना बरगद खड़ा था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *