रांची। झारखंड आंदोलन के पुरोधा, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक और आदिवासी समाज की आवाज रहे Shibu Soren को मरणोपरांत देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने यह सम्मान प्रदान किया।
दिवंगत शिबू सोरेन की ओर से उनकी पत्नी रूपी सोरेन ने राष्ट्रपति से पद्म भूषण सम्मान ग्रहण किया। इस अवसर पर राष्ट्रपति भवन में कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
आदिवासी अधिकारों और झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता थे शिबू सोरेन
शिबू सोरेन, जिन्हें आदरपूर्वक ‘दिशोम गुरु’ कहा जाता था, ने झारखंड राज्य आंदोलन को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने आदिवासी, दलित और वंचित समाज के अधिकारों के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया और अलग झारखंड राज्य के गठन की लड़ाई का नेतृत्व किया।
झारखंड की राजनीति में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। वे कई बार केंद्रीय मंत्री और झारखंड के मुख्यमंत्री भी रहे। उनके नेतृत्व में झारखंड मुक्ति मोर्चा राज्य की प्रमुख राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित हुआ।
झारखंड के लिए गौरव का क्षण
दिशोम गुरु को मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया जाना झारखंड के लिए गौरव का विषय माना जा रहा है। उनके समर्थकों और झामुमो कार्यकर्ताओं ने इसे उनके लंबे संघर्ष, सामाजिक योगदान और जनसेवा का राष्ट्रीय सम्मान बताया है।
