सुजीत सिन्हा की रिपोर्ट
गोला (रामगढ़)। चित्तरंजन सेवा सदन परिसर स्थित श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर के वार्षिकोत्सव के अवसर पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन श्रद्धालु भक्ति और आस्था में सराबोर नजर आए। सुबह यजमान कुँवर कुमार बक्शी ने पत्नी के साथ विधिवत पूजा-अर्चना की। सेवा सदन की संचालिका वंदना अम्बष्ट भी पूजा में शामिल हुईं। पुरोहित कृष्ण वल्लभ पाठक, भास्कर उपाध्याय और अमरेंद्र गुरु ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा संपन्न कराई।
गोवर्धन लीला का सुनाया महत्व
संध्या बेला में वृंदावन धाम से पधारे कथावाचक आचार्य अजय कृष्ण शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन लीला का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि गोवर्धन लीला मानव जीवन में अहंकार त्यागने, प्रकृति का सम्मान करने, गौसेवा और ईश्वर पर अटूट विश्वास रखने की प्रेरणा देती है। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने देवराज इंद्र के अहंकार को समाप्त करने के लिए अपनी कनिष्ठा अंगुली पर गोवर्धन पर्वत धारण कर ब्रजवासियों की रक्षा की थी।
कथा के दौरान वृंदावन से आई भजन मंडली के धनंजय दास, मोहित कुमार और आकाश जी ने भजनों की प्रस्तुति दी। भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे और पूरा मंदिर परिसर “राधे-राधे”, “जय श्रीकृष्ण” और “गोवर्धनधारी लाल की जय” के जयघोष से गूंज उठा।
वार्षिकोत्सव के तहत हो रहा आयोजन
चित्तरंजन सेवा सदन की संचालिका वंदना अम्बष्ट ने बताया कि स्वर्गीय डॉ. अजित कुमार की प्रेरणा और संकल्प के अनुरूप सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर की स्थापना के दस वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में वार्षिकोत्सव मनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आयोजन को सफल बनाने में कुँवर कुमार बक्शी, मधु बक्शी, अरुण कुमार बक्शी, सुजाता बक्शी, आकाश बक्शी सहित चित्तरंजन सेवा सदन के सभी सदस्य सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
