रांची। ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर में शनिवार को भगवान श्रीजगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा मौसीबाड़ी से अपने धाम लौट आए। इसके साथ ही नौ दिवसीय रथ यात्रा महोत्सव का श्रद्धा और भक्ति के माहौल में समापन हो गया।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गर्भगृह में हुई पुनर्स्थापना
नौ दिनों तक मौसीबाड़ी में प्रवास के बाद तीनों विग्रहों को विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ दोबारा मंदिर के गर्भगृह में विराजमान कराया गया। मुख्य पुजारी रामेश्वर पाढ़ी और शुद्धांशु नाथ सहदेव ने पूजा-अर्चना संपन्न कराई।
पूजा के बाद भगवान को रथ पर विराजमान कराया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने जय जगन्नाथ के जयघोष के साथ रथ खींचकर भगवान को जगन्नाथपुर मंदिर तक पहुंचाया।
दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
घुरती रथ यात्रा को लेकर जगन्नाथपुर मंदिर और मौसीबाड़ी परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी रही। हजारों भक्तों ने भगवान के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और राज्य में शांति एवं खुशहाली की कामना की।
मंदिर परिसर में शंखध्वनि, घंटों और नगाड़ों की गूंज के बीच पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए लंबी कतारों में खड़े रहे। महिलाओं, बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचकर भगवान के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।
प्रशासन ने किए सुरक्षा के विशेष इंतजाम
मंदिर समिति और सेवायतों की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। दर्शन के लिए अलग-अलग कतारें बनाई गईं। वहीं प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था, यातायात नियंत्रण, बैरिकेडिंग, पेयजल और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था की गई थी।
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ यात्रा के दौरान मौसीबाड़ी जाते हैं और नौ दिनों के बाद वापस अपने धाम लौटते हैं। भगवान की यह घर वापसी अत्यंत शुभ मानी जाती है।
जगन्नाथपुर रथ यात्रा झारखंड के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शामिल है। यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समरसता का भी संदेश देता है। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के मंदिर लौटने के साथ ही इस वर्ष की रथ यात्रा का विधिवत समापन हो गया।


