पश्चिम मेदिनीपुर। पश्चिम मेदिनीपुर और झाड़ग्राम जिलों में कई दिनों से लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है। निचले इलाके जलमग्न हो गए हैं और हजारों बीघा कृषि भूमि पानी में डूबने से किसानों के सामने भारी संकट खड़ा हो गया है। प्रशासन, जनप्रतिनिधि और विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक संगठनों ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिया है।
कई गांव जलमग्न, धान की फसल पर संकट
मोहनपुर प्रखंड के कई गांवों में पानी भरने से सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। हाल ही में रोपी गई अमन धान की फसल लंबे समय तक पानी में डूबी रहने से उसके नष्ट होने की आशंका बढ़ गई है। स्थानीय लोगों ने जल निकासी की समुचित व्यवस्था और प्रभावित किसानों को सरकारी सहायता देने की मांग की है।
दांतन प्रखंड के आइकला ग्राम पंचायत के हरिपुरा, षड़रंग सहित कई गांवों में भी खेती की भूमि जलमग्न हो गई है। किसानों का कहना है कि ऋण लेकर की गई धान की खेती पर अब संकट मंडरा रहा है।
बेलदा और बाखराबाद में बाढ़ जैसे हालात
नारायणगढ़ प्रखंड के बेलदा और बाखराबाद ग्राम पंचायत के कई हिस्सों में बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है। स्थानीय विधायक रमाप्रसाद गिरि नाव के माध्यम से जलमग्न क्षेत्रों में पहुंचे और प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री तथा तिरपाल वितरित किया। उन्होंने लोगों को हरसंभव सरकारी सहायता का भरोसा दिलाया।
प्रशासन और राजनीतिक दल सक्रिय
भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी नारायणगढ़ के काठालिया क्षेत्र में राहत सामग्री वितरित की। इस बीच, केशियाड़ी के लेंगामारा पुल के पास अस्थायी सड़क का निरीक्षण करने पुलिस अधीक्षक पापिया सुल्ताना अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचीं। तेज जलप्रवाह से सड़क बह जाने के बाद प्रशासन ने नई अस्थायी सड़क बनाकर यातायात बहाल किया है।
झाड़ग्राम में पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता
झाड़ग्राम जिले में कंसाबती नदी में डूबकर जान गंवाने वाले दो किशोरों के परिवारों को चार-चार लाख रुपये की सरकारी सहायता दी गई। विधायक लक्ष्मीकांत साउ ने प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में दोनों परिवारों को सहायता राशि के चेक सौंपे।
लगातार बारिश से किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में राहत, पुनर्वास, जल निकासी और फसल क्षति के आकलन का कार्य तेज कर रहा है।


