HomeBreaking Newsबालेन शाह के आधी रात वाले पोस्ट से नेपाल में सियासी हलचल,...

बालेन शाह के आधी रात वाले पोस्ट से नेपाल में सियासी हलचल, बोले- ‘कभी-कभी अकेले लड़ना पड़ता है’

काठमांडू। नेपाल की सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के भीतर बढ़ते मतभेदों के बीच प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के आधी रात किए गए सोशल मीडिया पोस्ट ने राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है। प्रधानमंत्री ने पोस्ट में किसी नेता, पार्टी या विवाद का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया, लेकिन उनके संदेश को मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है।

बालेन शाह ने फेसबुक पर लिखा, “कुछ समय लगेगा, सही समय आने के लिए। देर होगी, लेकिन गलत नहीं होगा। न घबराएं। सुनी और देखी गई बातों से वास्तविकता कभी-कभी अलग हो सकती है। कभी-कभी अकेले लड़ना पड़ता है। यह पहली बार नहीं है।”

प्रधानमंत्री का यह संदेश ऐसे समय सामने आया है जब उनकी अपनी पार्टी के कुछ सांसद सरकार की कार्यशैली और विभिन्न जनहित के मुद्दों को लेकर सार्वजनिक रूप से सवाल उठा रहे हैं।

सरकार की कार्यशैली पर अपने ही सांसदों के सवाल

आरएसपी सांसदों ने हाल के दिनों में संसद में सरकार से कई मुद्दों पर जवाब मांगा है। इनमें आम नागरिकों की दैनिक समस्याओं के अलावा रसोई गैस की कमी, रासायनिक खाद की उपलब्धता, किसानों की परेशानियां, गरीबों के अंतिम संस्कार से जुड़े खर्च और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे मुद्दे शामिल हैं।

सत्ता पक्ष के सांसदों की ओर से ही ‘सरकार कहां है?’ जैसे सवाल उठाए जाने को पार्टी के भीतर बढ़ती बेचैनी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री को सांसदों की आलोचना के अलावा पार्टी के कुछ नेताओं और समर्थक समूहों की ओर से भी सरकार की कार्यशैली को लेकर सवालों का सामना करना पड़ रहा है।

इस बीच प्रधानमंत्री बालेन शाह और आरएसपी अध्यक्ष रवि लामिछाने के बीच राजनीतिक समन्वय को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। पार्टी संगठन और सरकार के बीच अपेक्षित तालमेल को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच मतभेद की वास्तविक प्रकृति को लेकर सार्वजनिक रूप से कोई स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आई है। ऐसे में दोनों के बीच दूरी की खबरों को फिलहाल राजनीतिक अटकलों के तौर पर ही देखा जा रहा है।

‘अकेले लड़ना पड़ता है’ वाली टिप्पणी पर चर्चा तेज

इसी पृष्ठभूमि में शाह के पोस्ट में लिखा गया ‘कभी-कभी अकेले लड़ना पड़ता है’ वाक्य खासा चर्चा में है। शाह के पोस्ट की शुरुआत भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उन्होंने लिखा, “कुछ समय लगेगा, सही समय आने के लिए। देर होगी, लेकिन गलत नहीं होगा।”

प्रधानमंत्री ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह किस निर्णय या घटनाक्रम की ओर इशारा कर रहे हैं। इसलिए यह तय करना संभव नहीं है कि उनका संकेत किसी प्रशासनिक फैसले, पार्टी के भीतर बदलाव, सरकार के किसी बड़े निर्णय या भविष्य की राजनीतिक रणनीति से जुड़ा है।

हालांकि, मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में उनके संदेश को इस संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि वह तत्काल प्रतिक्रिया देने के बजाय किसी फैसले के लिए ‘सही समय’ का इंतजार कर रहे हैं।

मेयर से प्रधानमंत्री तक अलग पहचान

बालेन्द्र शाह राजनीति में आने से पहले काठमांडू महानगर के मेयर के रूप में अपनी अलग कार्यशैली के लिए चर्चा में रहे हैं। पारंपरिक राजनीतिक व्यवस्था से अलग उनकी छवि ने उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में भी एक अलग पहचान दिलाई।

अब प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें अपने ही राजनीतिक संगठन के भीतर से आलोचना और सवालों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में ‘अकेले लड़ने’ वाली टिप्पणी को कुछ लोग उनकी पुरानी राजनीतिक शैली से जोड़कर देख रहे हैं।

आरएसपी के सत्ता में आने के बाद सरकार और पार्टी संगठन के बीच संतुलन बनाए रखना नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है। एक ओर बालेन शाह सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं, वहीं रवि लामिछाने पार्टी संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

पार्टी में बड़ी संख्या में नए सांसदों और नेताओं के आने के बाद नेतृत्व, निर्णय प्रक्रिया और सरकार की जवाबदेही को लेकर अलग-अलग अपेक्षाएं भी सामने आई हैं। अगर पार्टी के भीतर असहमति और सार्वजनिक होती है, तो इसका असर सरकार की स्थिरता और प्रधानमंत्री शाह के नेतृत्व पर पड़ सकता है।

बालेन शाह के आधी रात के पोस्ट ने फिलहाल ज्यादा सवाल खड़े किए हैं, जवाब कम दिए हैं। उन्होंने न किसी व्यक्ति का नाम लिया और न ही यह बताया कि वह किस घटनाक्रम के संदर्भ में संदेश लिख रहे हैं।

हालांकि ‘देर होगी, लेकिन गलत नहीं होगा’, ‘वास्तविकता अलग हो सकती है’ और ‘कभी-कभी अकेले लड़ना पड़ता है’ जैसी पंक्तियों ने नेपाल की राजनीति में नई चर्चा जरूर छेड़ दी है।

अब नजर इस बात पर है कि प्रधानमंत्री शाह जिस ‘सही समय’ की बात कर रहे हैं, वह किस फैसले या राजनीतिक कदम से जुड़ा है। क्या यह पार्टी के भीतर चल रही खींचतान का जवाब होगा, सरकार में किसी बड़े बदलाव का संकेत या फिर बालेन शाह की नई राजनीतिक रणनीति की शुरुआत—इसका पता आने वाले दिनों में ही चलेगा।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments