ओडिशा में जापानी कंपनियों का ₹67,000 करोड़ निवेश। पढ़े पूरी रिपोर्ट…

भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने जापान के साथ आर्थिक साझेदारी को मजबूत करते हुए जापान की आईएचआई कॉर्पोरेशन और एसीएमई ग्रुप के साथ 67,000 करोड़ रुपये के निवेश संबंधी महत्वपूर्ण मेमोरेंडम ऑफ कोऑपरेशन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस निवेश से राज्य में हरित ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण और औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

ग्रीन ऊर्जा परियोजनाओं में होगा बड़ा निवेश

राज्य सरकार की ओर से आयोजित ‘इंटरैक्शन विद जापानी बिजनेस डेलीगेट्स’ कार्यक्रम के दौरान हुए इस समझौते से करीब 7,000 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है।

समझौते के तहत गोपालपुर-टाटा स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन में 0.4 एमटीपीए क्षमता का ग्रीन अमोनिया संयंत्र स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना में 20,000 करोड़ रुपये का निवेश होगा और लगभग 3,400 लोगों को रोजगार मिलेगा। इसके अलावा 1,000 करोड़ रुपये की लागत से जेटी-लेस फ्लोटिंग टर्मिनल का भी निर्माण किया जाएगा।

पारादीप में 0.8 एमटीपीए क्षमता का एक और ग्रीन अमोनिया संयंत्र स्थापित होगा, जिसमें 34,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। इस परियोजना से करीब 3,600 लोगों को रोजगार मिलेगा। वहीं 12,000 करोड़ रुपये की लागत से ग्रीन मेथनॉल परियोजना भी विकसित की जाएगी।

औद्योगिक विकास को मिलेगा बढ़ावा

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, उद्योग एवं कौशल विकास मंत्री संपद चंद्र स्वाईं, राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, वर्ल्ड बैंक समूह, जापान दूतावास और कई जापानी कंपनियों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि जापान भारत का भरोसेमंद विकास और निवेश साझेदार रहा है। यह समझौता ‘समृद्ध ओडिशा-2036’ और ‘विकसित भारत-2047’ के लक्ष्यों को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उद्योग मंत्री संपद चंद्र स्वाईं ने कहा कि निवेश-अनुकूल नीतियों, मजबूत आधारभूत संरचना और पारदर्शी प्रशासन के कारण ओडिशा वैश्विक निवेशकों की पहली पसंद बनता जा रहा है।

आईएचआई कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष हिरोशी इदे ने ओडिशा की औद्योगिक क्षमता और प्राकृतिक संसाधनों की सराहना की। वहीं एसीएमई ग्रुप के संस्थापक एवं अध्यक्ष मनोज उपाध्याय ने कहा कि यह साझेदारी भारत के स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र को नई दिशा देगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से हरित हाइड्रोजन, ग्रीन अमोनिया, ग्रीन मेथनॉल, एयरोस्पेस, शिपबिल्डिंग, लॉजिस्टिक्स, इस्पात और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भविष्य के निवेश के नए अवसर खुलेंगे। साथ ही एमएसएमई, सहायक उद्योगों और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

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