नल-जल योजना के लिए केंद्रांश के 6,277 करोड़ बकाया : योगेंद्र

रांची। विधानसभा में बजट सत्र के दौरान शनिवार को पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की योजनाओं को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सदन की दूसरी पाली में तीखी बहस हुई। इस दौरान पेयजल मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि विपक्ष को तथ्यों को सुनना चाहिए। उन्होंने कहा कि पेयजल विभाग की योजनाओं को लेकर विपक्ष गलत आरोप लगा रहा है।

मंत्री ने कहा कि नल-जल योजना का कुल बजट 24,665 करोड़ रुपये का है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार की 50-50 प्रतिशत भागीदारी है। उन्होंने कहा कि अब तक केंद्र की ओर से केवल 5,987 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए हैं, जबकि राज्य सरकार की ओर से 7,385 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। केंद्र के हिस्से के 6,277 करोड़ रुपये अब भी बकाया हैं।

मंत्री ने बताया कि विभाग की ओर से केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय को कई बार पत्र लिखा गया और चार बार वे स्वयं दिल्ली जाकर केंद्रीय मंत्री से मुलाकात की, लेकिन बकाया राशि अब तक जारी नहीं की गई। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में केवल 77 करोड़ रुपये मिले, जबकि 2025-26 में एक भी रुपया नहीं मिला।

विपक्ष के नल-जल योजना में गड़बड़ी के आरोपों पर मंत्री ने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ कडी कार्रवाई कर रही है। दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।

इस दौरान नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि उन्होंने उत्पाद (एक्साइज) विभाग में हुई कथित गड़बड़ी का मुद्दा उठाया था। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखा गया था। उन्होंने सवाल उठाया कि इस मामले में एसीबी द्वारा अब तक चार्जशीट क्यों दाखिल नहीं की गई। इसपर मंत्री कहा कि पूरे मामले की जांच एसीबी कर रही है। साक्ष्यों के आधार पर ही चार्जशीट दायर की जाएगी। जल्दबाजी में चार्जशीट दाखिल करने से आरोपियों को लाभ मिल सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी।

वहीं स्पीकर रबीन्द्र नाथ महतो ने विपक्ष के कटौती प्रस्ताव को अस्वीकृत करते हुए मांगे स्वीकृत कर दी। इसके साथ ही उन्होंने सदन की कार्यवाही 16 मार्च की सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

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