मिट्टी खुदाई के दौरान मिली 800 वर्ष पुरानी भगवान विष्णु की प्राचीन मूर्ति

किशनगंज। जिले के बहादुरगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत रामचर भैरादह गांव में मिट्टी खुदाई के दौरान भगवान विष्णु की एक प्राचीन मूर्ति मिलने से क्षेत्र में उत्साह और श्रद्धा का माहौल बन गया। लगभग 800 वर्ष पुरानी बताई जा रही यह प्रतिमा कर्णाटवंश काल की मानी जा रही है।

पुरातात्विक महत्व को देखते हुए मूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए भागलपुर संग्रहालय भेज दिया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह मूर्ति ग्रेनाइट पत्थर से बनी है, जिसकी लंबाई लगभग 49 इंच तथा चौड़ाई 21 इंच बताई जा रही है। मूर्ति मिलने की खबर फैलते ही आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग इसे देखने पहुंच गए।

स्थानीय लोगों ने मूर्ति को गांव में ही स्थापित करने की मांग भी उठाई। बिहार स्टेट इंटैक के को-कन्वेनर डॉ. शिव कुमार मिश्र ने इस संबंध में पुरातत्व निदेशक को सूचना दी। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई करते हुए मूर्ति को सुरक्षित संरक्षण हेतु भागलपुर संग्रहालय भेजने का निर्णय लिया गया।

डॉ. मिश्र ने बताया कि यह मूर्ति कर्णाट काल की है और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की दुर्लभ पुरातात्विक संपदा को संग्रहालय में सुरक्षित रखना आवश्यक है, ताकि भविष्य की पीढ़ियां भी इसके ऐतिहासिक महत्व को समझ सकें। उन्होंने यह भी बताया कि यह पहली बार नहीं है जब किशनगंज जिले से प्राप्त प्राचीन मूर्तियां भागलपुर संग्रहालय भेजी गई हों।

वर्ष 2023 में बंदरझुला क्षेत्र से मिली भगवान विष्णु, गरुड़ और त्रिविक्रम की प्राचीन मूर्तियों को भी संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया था। इससे संग्रहालय में दुर्लभ पुरातात्विक संग्रह लगातार बढ़ रहा है। इधर, स्थानीय ग्रामीण मूर्ति को गांव में ही स्थापित करने की मांग कर रहे हैं।

दर्जनों ग्रामीणों ने जिलाधिकारी विशाल राज को आवेदन देकर गांव में मंदिर निर्माण कर मूर्ति स्थापित करने की अनुमति मांगी है। ग्रामीणों ने बताया कि मंदिर निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है तथा लगभग पांच कट्ठा जमीन मंदिर के नाम पर दान भी की जा चुकी है। पुरातत्व विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में इस तरह के पुरातात्विक अवशेषों की सुरक्षा के लिए सख्त कानूनी प्रावधानों की आवश्यकता है।

किशनगंज जिले में मिली इस ऐतिहासिक खोज ने एक बार फिर संकेत दिया है कि इस क्षेत्र में प्राचीन सभ्यता के महत्वपूर्ण अवशेष मौजूद हैं। वहीं, भागलपुर संग्रहालय में इस मूर्ति के शामिल होने से पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों के लिए यह एक नया आकर्षण केंद्र बन गया है।

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