नई दिल्ली : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में गुरुवार को प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण में भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति को वैश्विक अनिश्चितताओं के समुद्र में अपने दम पर मजबूती से आगे बढ़ते जहाज के रूप में दर्शाया गया है और अगले वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 6.8-7.2 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान जताया गया है।
सर्वेक्षण में कहा गया है कि 31 मार्च 2026 को समाप्त हो रहे चालू वित्त वर्ष में वृद्धि सात प्रतिशत से ऊपर रहेगी जो इस माह के शुरू में राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के पहले अग्रिम अनुमान की तुलना में सावधानी भरा लगता है। एनएसओ ने चालू वित्त वर्ष में जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। आर्थिक वृद्धि की इस गति को घरेलू अर्थव्यवस्था की बुनियादी ताकत और नीतिगत सुधारों पर आधारित और प्रेरित बताया गया है।
सर्वे में सुधारों पर बल दिया गया है। इसके लेखक और मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा है कि सुधारों के जरिये भारत की वृद्धि दर को तीन वर्ष में वार्षिक आठ प्रतिशत के स्तर तक ले जाया जा सकता है।
समीक्षा में कहा गया है कि अप्रैल 2025 में अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर घोषित आयात शुल्क के मद्देनजर सरकार ने नीतिगत और आर्थिक सुधारों पर भी ध्यान दिया और अब भारत चालू वित्त वर्ष के लिए सात प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की उम्मीद कर रहा है।
सर्वेक्षण में कहा गया है , “वर्ष 2025 की विडंबना यह है कि दशकों में सबसे मजबूत भारत के व्यापक आर्थिक प्रदर्शन का एक ऐसी वैश्विक प्रणाली से टकराव हो गया है जिसमें अब (देशों की) मौद्रिक स्थिरता, पूंजी प्रवाह या रणनीतिक सुरक्षा के रूप में अच्छी व्यापक आर्थिक सफलता दर्ज करने वाले देशों को उसका लाभ नहीं मिल रहा है।”
डॉ. नागेश्वरन ने अपने प्राक्कथन में कहा है, “साल 2025 दुनिया के लिए, जिसमें भारत भी शामिल है, शायद कुछ उम्मीदों के साथ शुरू हुआ और दूसरी उम्मीदों के साथ खत्म हुआ। हालांकि, एक खास बात जो लगातार बनी रही, वह थी कि कोविड के बाद से लगातार दिख रहा भारत का मजबूत व्यापक आर्थिक प्रदर्शन बरकरार रहा।”
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने आर्थिक समीक्षा की प्रस्तावना में कहा है कि अनिश्चितता के इस दौर में ‘उद्यमशीलता की नीति’ करने की दिशा में बढ़ने और गहन बदलाव की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसी नीति हो कि अनिश्चितता के उभरने से पहले ही उससे निपटने की कार्रवाई की जा सके, जोखिम से बचने की बजाय उनके बीच सही दिशा में आगे बढ़ने की क्षमता सृजित करे।
समीक्षा में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में आर्थिक वृद्धि मजबूत थी और अगली दो तिमाहियों में इसमें और सुधार हुआ। रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में तेज से कटौती की और बैंकों के पास कर्ज के लिए नकदी की उपलब्धता बढ़ाई।
सरकार ने गत फरवरी में पेश वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में व्यक्तिगत आय कर में महत्वपूर्ण छूट की घोषणा की। राजकोषीय घाटे को बजट में इससे पिछले वित्त वर्ष के जीडीपी के 4.9 प्रतिशत के मुकाबले 4.8 प्रतिशत पर लाया गया और इस वर्ष इसे 4.4 प्रतिशत तक सीमित का करने का लक्ष्य रखा गया।
आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2020-21 के 9.2 प्रतिशत से घटकर केंद्र का राजकोषीय घाटा आधे से भी कम हो रहा है। राजकोषीय मजबूती के आधार पर भारत को 2025 में तीन क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने भारत की क्रेडिट रेटिंग को अपग्रेड किया।
इसमें कहा गया है कि घरेलू मांग से आर्थिक विकास को निरंतर बढ़ावा मिल रहा है। पहले अग्रिम अनुमान का हवाला देते हुए सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा गया है कि निजी अंतिम उपभोग व्यय चालू वित्त वर्ष में बढ़कर जीडीपी के 61.5 प्रतिशत तक पहुंचा जो वर्ष 2011-12 से इसका उच्चतम स्तर है। यह 2022-23 में भी इसी स्तर पर था।
इसमें कहा गया है कि उपभोग की शक्ति आर्थिक वातावरण के लिए सहायक है और इसे निम्न मुद्रास्फीति, रोजगार की मजबूत स्थिति और क्रय शक्ति की वृद्धि से बल मिला है। कृषि के मजबूत प्रदर्शन से प्रेरित स्थिर ग्रामीण उपभोग और प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष करों युक्तिसंगत बनाने से शहरी उपभोग में निरंतर सुधार दिखा है।
सकल निर्धारित पूंजी निर्माण (जीएफसीएफ) चालू वित्त वर्ष में अनुमानित 30 प्रतिशत रहने से वृद्धि को निरंतर बढ़ावा मिला है। जीएफसीएफ में 7.6 प्रतिशत विस्तारित के साथ पहली छमाही में होने के साथ निवेश मजबूत हुआ है। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 7.1 प्रतिशत था।
वित्त वर्ष 2025-26 में कृषि और अनुषंगी क्षेत्र की वृद्धि 3.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। पहली छमाही में अनुकूल मानसून से सहायता मिली।
कृषि संबंधी सकल मूल्यवर्धन (जीवीए) पहली छमाही में 3.6 प्रतिशत रहा जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के 2.7 प्रतिशत से अधिक है लेकिन 4.5 प्रतिशत के दीर्घ अवधि के औसत से कम है।
समीक्षा में औद्योगिक क्षेत्र की मजबूती झलकती है। पहली छमाही में इस क्षेत्र की वृद्धि 8.4 प्रतिशत रही और पूरे वर्ष में इसकी वृद्धि 7.0 प्रतिशत से अधिक रहने का अनुमान है।
जीडीपी में विनिर्माण क्षेत्र का हिस्सा 17-18 प्रतिशत पर मजबूत बना हुआ है। इस्पात उपभोग और सीमेंट उत्पाद जैसे निर्माण संकेतकों में निरंतर वृद्धि देखी गई है। आगे देखते हुए, जीएसटी की दरों को युक्तिसंगत बनाने और अनुकूल मांग आउटलुक से प्रेरित औद्योगिक कार्यकलापों में गति के मजबूत बने रहने का अनुमान है।
पहली छमाही में सेवाओं के लिए सकल मूल्य संवर्धन (जीवीए) में 9.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी जबकि पूरे वित्त वर्ष के लिए सेवा क्षेत्र के जीवीए में वृद्धि 9.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था।
समीक्षा में मुद्रास्फीति में गिरावट का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि यह घटकर 1.7 प्रतिशत पर आ गयी है। इसमें सब्जी और दलहनों कीमतों में गिरावट का मुख्य योगदान रहा है। मुद्रास्फीति पर अंतर्निहित दबाव नरम प्रतीत होते हैं तथा जीएसटी की दरों को तर्कसंगत बनाये जाने तथा आपूर्ति पक्ष की परिस्थितियां को देखते हुए निकट भविष्य में भी इसके नरम बने रहने की उम्मीद है।
वित्त वर्ष 2025-26 में देखी गई घरेलू मांग और पूंजी निर्माण में गति को एक विवेकपूर्ण राजकोषीय नीति, रणनीति का समर्थन मिला। प्रत्यक्ष कर संग्रह बजटीय वार्षिक लक्ष्य (नवम्बर, 2025 तक) का वार्षिक अनुमान के लगभग 53 प्रतिशत तक पहुंच चुका था। अप्रत्यक्ष कर संग्रह भी निम्न मुद्रास्फीति दर और आयात में उतार चढ़ाव के बावजूद मजबूत बना रहा है।
नवम्बर 2025 तक पूंजीगत बजट आवंटन के लगभग 60 प्रतिशत का उपयोग किया जा चुका था जबकि अतिरिक्त राजस्व व्यय में वृद्धि सीमित बनी रही जो सार्वजनिक व्यय की गुणवत्ता की मजबूती दिखाती है।
सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा गया है कि आरबीआई की नीतिगत दर के कम होने के साथ साथ सरकारी प्रतिभूतियों पर यील्ड (निवेश प्रतिफल) गिरने से कर्ज की लागत कम हो रही है जो अपने आप में आर्थिक प्रोत्साहन को प्रेरित करने वाला रुझान है ।
फरवरी, 2025 से आरबीआई की रेपो दर में कुल मिलाकर 1.25 प्रतिशत की कमी तथा आरक्षित नकदी अनुपात में कटौती के माध्यम से 2.5 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त धन कर्ज के लिए उपलब्ध होने के साथ साथ आरबीआई के ओपन मार्केट ऑपरेशंस (6.95 लाख करोड़ रुपये) और लगभग 25 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा स्वैप (अदला-बदली) की सुविधा से कर्ज बाजार की स्थिति बेहतर हुई है। इससे अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के नए कर्जों पर ब्याज दर 0. 59 प्रतिशत कम हुआ है।
