नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी सांसदों से संसद का कार्य सुचारू रूप से संचालित करने में सहयोग का आग्रह करते हुए कहा है कि आज समय व्यवधान का नहीं बल्कि समाधान का है और देश के विकास में लाभकारी परिणाम देने के लिए सभी को इस समय का उपयोग करना चाहिये।
श्री मोदी ने संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले यहां संसद भवन परिसर में गुरूवार को पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि यह समय कार्यों में बाधा डालने का नहीं बल्कि समस्याओं के समाधान का है।
उन्होंने कहा “इस समय हमारी प्राथमिकता व्यवधान नहीं बल्कि समाधान है। यह हिम्मत ,समाधान और निर्णय का समय है इसलिए सभी सांसदों को राष्ट्र के लिये आवश्यक समाधानों को गति देने की दिशा में अपनी शक्ति का इस्तेमाल करना होगा ताकि उनके निर्णयों के लाभकारी परिणाम देश को प्राप्त हो सकें।
श्री मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के कल संसद के संयुक्त सत्र में दिये गये अभिभाषण का जिक्र करते हुए कहा “राष्ट्रपति का अभिभाषण देश के 140 करोड़ लोगों की अभिव्यक्ति, उसका लेखा जोखा और खासकर युवाओं की अभिव्यक्ति को रेखांकित करने वाला था। यह बहुत ही सटीक अभिभाषण था और इसमें कई मार्गदर्शक बातें राष्ट्रपति जी ने कल सदन के सामने रखी। सत्र के आरंभ में और 2026 की शुरुआत में राष्ट्रपति ने सभी सांसदों से जो अपील की वह एक राष्ट्र की मुखिया के रूप में उनकी भावना की अभिव्यक्ति थी और मुझे विश्वास है कि सभी माननीय सदस्यों ने इसे गंभीरता से लिया होगा। यह महत्वपूर्ण सत्र है और देश के विकास के महत्वपूर्ण अगले 25 वर्ष का दौर शुरू हो चुका है। यह इस दौर का बजट है।”
उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण देश की पहली वित्त मंत्री हैं, महिला वित्तमंत्री हैं, जो लगातार नौंवीं बार संसद में बजट पेश करने जा रही है। यह खुद में एक गौरव का पल है और भारतीय संसदीय इतिहास में इस पल को लिखा जा रहा है। उनका कहना था कि भारत आज विश्व के लिए आशा की किरण, आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
प्रधानमंत्री ने यूरोपीय संघ के साथ हुये समझौते का उल्लेख करते हुए कहा “दूसरे 25 साल की शुरुआत में ही यूरोपीय संघ के साथ जो समझौता हुआ है वह देश के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की झलक है। मैं सभी उत्पादकों से आग्रह करूंगा कि जब भारत यूरोपीय संघ के बीच ‘मदर ऑफ ऑल डील’ हुई है तो मुझे उम्मीद है कि देश के उद्योगों, विनिर्माण क्षेत्र के लिए अब बड़ा बाजार खुल गया है। उनका सामान बड़े बाजार में पहुंचने का यह अवसर है। अब बाजार खुल गया है तो सर्वोत्तम गुणवत्ता का सामान हमें बाजार में पेश करना है और यूरोपीय संघ के देशों के खरीदारों का दिल जीतना है और उनमें अपनी वस्तुओं की गुणवत्ता का प्रभाव देना है, जो उनके दिल में दशकों तक रहेगा और भारत के लिए नये गौरव का अवसर प्रदान करेगा। यूरोप के 27 देश के साथ हुआ यह समझौता देश के मछुआरों किसानों और सेवा क्षेत्र के लोगों के लिए बहुत बड़ा अवसर लेकर आ रहा है। यह समझौता सब में एक तरह का आत्मविश्वास और प्रतिस्पर्धा तैयार करेगा।”
श्री मोदी ने कहा कि बजट पर देश का ध्यान स्वाभाविक है और सरकार का प्रयास परफॉर्म, रिफॉर्म, ट्रांसफर का रहा है। अब हम उससे भी आगे निकल चुके हैं और सबको इसे गति देने में अपनी सकारात्मक ऊर्जा का इस्तेमाल करना है। उनका कहना था कि देश लंबे समय की समस्या से निकलकर लंबी अवधि के समाधान की तरफ निकल चुका है। हमें लेकर दुनिया काे भरोसा है और हम तकनीकी, प्रतिस्पर्धा के साथ उसे आत्मसात करेंगे तथा मानव कल्याण केंद्रित व्यवस्था को तकनीक के साथ समाहित करते हुए आगे बढ़ेंगे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में पसंद, ना पसंद स्वाभाविक है लेकिन योजनाओं को सभी तक पहुंचाने का प्रयास हमारा रहता है। हमारे प्रयास देश के लोकतंत्र और देश की आबादी तथा दुनिया के लिए उम्मीद बनें हैं। हमें विश्व समुदाय को अपनी सामर्थ्य का संदेश देना है। हम सबको लोकतंत्र द्वारा किये गए निर्णय का सम्मान करना है।
