भारत में निपाह वायरस के संक्रमण का जोखिम बहुत कमः डब्ल्यूएचओ

नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भारत-बांग्लादेश के जंगलों में चमगादड़ों की मौजूदगी के बावजूद पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के संक्रमण के जोखिम को मध्यम दर्जे का बताया है। अलबत्ता, राष्ट्रीय, क्षेत्रीय एवं वैश्विक जोखिम का स्तर निम्न है। इस समय इस संक्रमण के इंसानों से इंसानों में फैलने के अब तक कोई तथ्य सामने नहीं आए हैं।

डब्ल्यूएचओ ने एक बयान में कहा कि भारत सरकार ने पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के संक्रमण के दो मामलों की पुष्टि की है। संक्रमित दोनों व्यक्ति 25 वर्ष की आयु के हैं, जिनमें एक महिला और एक पुरुष है। ये दोनों व्यक्ति उत्तरी 24 परगना ज़िले के एक निजी अस्पताल में कार्यरत हैं। इन दोनों व्यक्तियों में विगत दिसंबर के अंतिम दिनों में संक्रमण के आरम्भिक लक्षण विकसित हुए थे जो बहुत तेज़ी से तंत्रिका संबंधी जटिलताओं में तब्दील हो गए थे। इन दोनों संक्रमित व्यक्तियों को जनवरी के आरम्भिक दिनों में चिकित्सकीय एकांतवास में रखा गया था।

संक्रमण के मामलों का पता चलने के बाद सार्वजनिक स्वास्थ्य से संबंधित एक व्यापक कार्रवाई शुरू की गई। इन दो संक्रमित व्यक्तियों के संपर्क में आए कुल 196 व्यक्तियों की पहचान निर्धारित की गई। उनका पता लगाया गया और उन्हें स्वास्थ्य निगरानी में रखा गया और उनके परीक्षण किए गए। इन सभी लोगों में संक्रमण के कोई लक्षण नहीं देखे गए और इन सभी लोगों के परीक्षण में निपाह वायरस का कोई संक्रमण नहीं पाया गया।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार निपाह वायरस के संक्रमण मामले सिर्फ उत्तरी 24 परगना ज़िले तक ही सीमित हैं और लोगों की यात्रा के ज़रिए इनके किसी अन्य स्थान पर फैलने की कोई जानकारी नहीं है। भारत के किसी अन्य प्रदेश में या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस संक्रमण के फैलने की सम्भावना बहुत कम है।

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक निपाह वायरस पशुओं से इंसानों में फैलने वाली एक बीमारी है जो मुख्य रूप से चमगादड़ों से इंसानो में संक्रमित भोजन खाने या निकट सम्पर्क में आने से फैलती है। इस बीमारी का फ़िलहाल कोई उपचार नहीं है और न ही इसकी रोकथाम के लिए अभी कोई वैक्सीन उपलब्ध है। अलबत्ता, कुछ वैक्सीन पर प्रयोग जारी हैं। इससे बचने के लिए बहुत आरम्भिक स्तर पर पता लगाना, संक्रमण की पुष्टि होने पर उपयुक्त देखभाल और संक्रमण को दीगर फैलने से रोकने के ठोस उपाय अपनाया जाना बहुत अनिवार्य है।

डब्ल्यूएचओ ने कहा कि भारत अतीत में भी निपाह वायरस के संक्रमण से निपटने की क्षमता का प्रदर्शन कर चुका है और इन मामलों में भी राष्ट्रीय एवं प्रांतीय स्वास्थ्य टीमें, सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए चिकित्सा के नज़रिए से उपयुक्त उपाय लागू कर रही हैं। डब्ल्यूएचओ ने मौजूदा स्थिति को देखते हुए किसी तरह के यात्रा प्रतिबंधों की सिफ़ारिश नहीं की है।

उल्लेखनीय है कि भारत में निपाह वायरस के संक्रमण का यह सातवां दर्ज मामला है और पश्चिम बंगाल में तीसरा। इससे पहले सिलीगुड़ी में वर्ष 2001 में और वर्ष 2007 में नादिया में इस वायरस के संक्रमण के मामले दर्ज कि गए थे। प्रभावित ज़िले बांग्लादेश सीमा के निकट हैं। याद रहे कि बांग्लादेश में निपाह वायरस का संक्रमण लगभग हर साल दर्ज किया जाता है।

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