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प्रशांत किशोर ने बंटी यादव हत्याकांड में पीड़ित परिवार से की मुलाकात, दोषियों और लापरवाह पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग

पटना।

जन सुराज पार्टी के सूत्रधार और बांकीपुर उपचुनाव में प्रत्याशी प्रशांत किशोर ने गुरुवार को पटना के न्यू करबिगहिया निवासी बंटी कुमार यादव की हत्या के मामले में पीड़ित परिवार से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने शोक संतप्त परिजनों को सांत्वना दी। उन्होंने पीड़ित परिवार को भरोसा दिलाया कि उन्हें न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। साथ ही उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष एवं त्वरित जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की।

मीडिया से बातचीत करते हुए पीके ने कहा कि चार-पांच दिन पहले मैं यहां आया था, तब परिवार के लोग धरने पर बैठे थे। वहां पुलिस प्रशासन भी था। जब पुलिस ने और हमने परिवार से यह कहा कि पुलिस को कार्रवाई करने दीजिए। पुलिस ने आश्वस्त किया कि 2 दिन के अंदर लड़के को ढूंढकर ला दिया जाएगा। इसके बाद परिवार ने बिना किसी परेशानी के अपना धरना-प्रदर्शन बंद कर दिया। उन्होंने पुलिस की बात मानकर जो रोड जाम किया हुआ था, वह लोग वहां से हट गए। उसके बाद वे लोग कोतवाली गए। फिर शाम में मुझसे मुलाकात हुई, तो परिवार ने बताया कि कोतवाली थाना की पुलिस हमारे साथ सहयोग नहीं कर रही है। पूरे दिन पीड़ित की मां, उनके भाई और उनके परिजन थाने में बैठे रहे, लेकिन पुलिस ने उनकी कोई मदद नहीं की। उसी दिन रात में 10 बजे इनकी मुझसे मुलाकात हुई। मैंने फिर इनसे बात की और पुलिस ने यह आश्वस्त किया कि 2 दिन के अंदर हर हाल में बंटी यादव को ढूंढ लिया जाएगा।

पीके ने कहा कि चार दिन के बाद अब हम लोग सुन रहे हैं कि उस बच्चे की लाश मिली है। पीड़ित के परिजन तीन बातें कह रहे हैं। उनकी पहली मांग है कि इसमें जो भी शामिल लोग हैं, उनके खिलाफ नामजद एफआईआर किया गया है, उनकी अभिलंब गिरफ्तारी की जाए और कानून के तहत सख्त से सख्त सजा दी जाए।

दूसरी मांग यह है कि जो पुलिस इसमें इन्वॉल्व रही है, पुलिस वालों की जो भूमिका है, चाहे वह कोतवाली थाना के हों या जक्कनपुर थाना के, इन्वॉल्व पदाधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। क्योंकि पुलिस को ऐसा लगता है कि घटना हो गई, अपराधी पकड़ा जाए या न पकड़ा जाए, परिवार वालों को जो दिक्कत हो, हो; पुलिस का अपना जीवन चल रहा है। हर हालत में दोनों ही थानों से संबंधित पुलिस पदाधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

तीसरी मांग यह है कि यह बहुत साधारण परिवार के लोग हैं। उनकी पत्नी को या उनके घर में जो भी योग्य हों, सरकार की ओर से मुआवजा दिया जाना चाहिए और नौकरी दी जानी चाहिए।

सरकार के आपराधिक चरित्र के कारण हो रही घटनाएं- पीके

पीके ने कहा कि यह घटना जो हुई है, इसमें कहीं न कहीं सरकार का जो आपराधिक चरित्र है कि जाति देखकर गोली मारो, गमछा देखकर गोली मारो और धर्म देखकर गोली मारो। जब सरकार का मुखिया ही इस तरीके के शब्दों का प्रयोग करेगा, तो आप इस तरह के अपराध को बढ़ते हुए ही देखेंगे। पुलिस का जो रवैया है, किसी की मौत के बाद यह बताना कि वह शराब का काम करता था, यह सरासर गलत और नाइंसाफी है। अगर वह व्यक्ति गलत था, तो उसको गिरफ्तार करना था।

अगर पुलिस की बात मान भी लें कि बंटी शराब के धंधे में इन्वॉल्व था, तो उसके ऊपर कोई केस क्यों नहीं था? उस हालत में भी यहां के पुलिस पदाधिकारी सब सस्पेंड होने चाहिए। कैसे उनके थाना क्षेत्र के अंतर्गत कोई व्यक्ति शराब का धंधा कर रहा था? पीके ने कहा कि स्थानीय लोग बता रहे हैं कि इस पूरे इलाके में जो भी गलत काम हो रहे हैं, वे बिना पुलिस की मिलीभगत के संभव नहीं हैं। पुलिस अपनी जान बचाने के लिए मरे हुए व्यक्ति के चरित्र पर सवाल उठा रही है, जो सरासर गलत है।

अगर उस आदमी के खिलाफ पहले से कोई केस दर्ज नहीं है, तो पुलिस को कोई अधिकार नहीं है यह कहने का कि वह आदमी गलत था। अगर वह आदमी गलत था, तो पहले पुलिस ने उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की? पहले उस पर एफआईआर क्यों नहीं की? इसका मतलब है कि उस लड़के पर कम से कम कानून के तहत कोई ऐसा अपराध नहीं था। पुलिस की गलती से उसकी हत्या हुई है। पुलिस को जवाबदेही लेनी चाहिए। सरकार को अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। हर हालत में अपराधियों को सजा होनी चाहिए और पुलिस पर कार्रवाई होनी चाहिए।

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