बांग्लादेश में तारिक रहमान की वापसी ,नतीजों से बंगाल-असम चुनाव पड़ेगा असर !

बांग्लादेश चुनाव में तारिक रहमान की अगुवाई वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने प्रचंड जीत हासिल की है। पीएम मोदी ने तारिक रहमान को जीत की बधाई दी है। बीएनपी ने 209 सीटों पर जीत दर्ज कर दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लिया है। चुनाव में BNP ने जमात-ए-इस्लामी और छात्रों की पार्टी नेशनल सिटीजन पार्टी के गठबंधन को हराकर 200 से ज्यादा सीटों पर जीत हासिल कर ली है। BNP ने 299 सीटों में से दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लिया है। इन नतीजों से तस्वीर साफ हो गई है कि बांग्लादेश में तारिक रहमान प्रधानमंत्री बनने वाले हैं। तारिक रहमान ने दो सीटों से चुनाव लड़ा था और दोनों से जीत दर्ज की है।

देश के 36 हजार वोटिंग सेंटर्स पर करीब 47.91 फीसदी वोटिंग हुई। हालांकि, वोटिंग के दौरान कुछ जगह झड़पें भी हुईं। तारिक रहमान की BNP के एक नेता की मौत हो गई, जबकि कई कार्यकर्ता घायल हुए। बांग्लादेश में पहली बार संसदीय चुनाव के साथ जनमत संग्रह भी कराया गया और पहली बार डाक पत्र से मतदान की व्यवस्था की गई। बांग्लादेश में मुख्य मुकाबला BNP के तारिक रहमान और जमात के शफीकुर्रहमान के बीच था, इसमें तारिक रहमान ने बाजी मारी है। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पार्टी के प्रमुख तारिक रहमान को जीत की बधाई दी। पीएम मोदी ने कहा कि यह जीत बांग्लादेश के लोगों के उनके नेतृत्व में भरोसे को दिखाती है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के समर्थन में हमेशा खड़ा रहेगा। ऐसे में बांग्लादेश के चुनावी नतीजों का क्या बंगाल और असम के चुनाव में किस तरह का सियासी प्रभाव पड़ेगा? बांग्लादेश के चुनावी नतीजे ऐसे समय आए हैं, जब पश्चिम बंगाल और असम में विधानसभा चुनाव के लिए सियासी सरगर्मी तेज है. पिछले दो साल से राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहे बांग्लादेश के आम चुनाव में बीएनपी की बंपर जीत का सियासी असर भारत के संबंध के साथ बल्कि बंगाल और असम की सियासत पर भी पड़ेगा?बांग्लादेश की 4000 किलोमीटर की सीमा भारत से लगती है. यह भारत की किसी भी पड़ोसी के साथ सबसे लंबी सीमा है. ऐसे में भारत की शांति और सुरक्षा के लिए एक स्थिर बांग्लादेश जरूरी है.बांग्लादेश के हालात सीधे तौर पर बंगाल की राजनीति को प्रभावित करते हैं. सीमा सुरक्षा पर बीजेपी और टीएमसी के बीच जुबानी जंग बड़ा आकार ले चुकी है. इतना ही नहीं असम में भी बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा हमेंशा से गर्म रहा है और मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा लगातार अवैध घुसपैठ करने वालों को चिह्नित करके वापस भेजने की मुहिम में जुटे हैं.

असम और बंगाल दोनों राज्यों में मुस्लिम समुदाय की आबादी 30 फीसदी के करीब है.

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