झारखंड में अवैध तरीके से नियुक्त डीजीपी की संपत्ति की जांच हो, वेतन की हो वसूली: बाबूलाल

रांची। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने डीजीपी की नियुक्ति संबंधी उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद शुक्रवार को राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा है।

मरांडी ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा है कि एक महीने के भीतर प्रकाश सिंह जजमेंट के तहत यूपीएससी से अनुमोदित करायी गयी सूची से ही डीजीपी की नियुक्ति के उच्चतम न्यायालय के नवीनतम आदेश के बाद यह तय है कि अब झारखंड सरकार को भी ये काम करना ही पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि यह भी साफ हो गया है कि डीजीपी की नियुक्ति में झारखंड सरकार की अंधेरगर्दी और मनमानी के खिलाफ हमने कानून सम्मत जो लंबी लड़ाई लड़ी, उसका सकारात्मक परिणाम अब सामने आया है।

उन्होंने कहा कि रिटायर होने के बाद भी ग़ैर कानूनी तरीके से डीजीपी के पद पर काम कर रहीं तदाशा मिश्रा अपेक्षाकृत बेहतर अधिकारी हैं, उनसे आग्रह है कि वे अपनी और फ़ज़ीहत कराने से बाज आयें। क़ानून की बारीकियों को समझें, उसका पालन करें और इससे पहले कि उन्हें उच्चतम न्यायालय के आदेश के आलोक में निकाल बाहर किया जाय, वे स्वतः डीजीपी का पद छोड़कर नैतिक मूल्यों का पालन करें।

उन्होंने कहा कि यह हमारी समझ से परे है कि सेवा काल में किसी बड़े विवाद से दूर रहने वाली उनके जैसी अधिकारी आख़िर किस वजह से अपने पूरे कैरियर की अच्छाई को ग़ैर क़ानूनी काम करते हुए बट्टा लगाने की सोचेगा और हंसी का पात्र बनना चाहेगा?

उन्होंने कहा कि उनकी ये लड़ाई यहीं रुकने वाली नहीं है। झारखंड में इस तरह ग़लत तरीके से जितने भी डीजीपी अबतक बने और पद पर रहे हैं, उनसबों की ओर से वेतन एवं अन्य मद में ली गई रकम की वसूली, उनके ओर से किये गये कार्यों को रद्द कराने और उनसबों की संपत्ति की जांच कराने के लिये वे उच्च न्यायालय से लेकर उच्चतम न्यायालय तक जाने को तैयार हैं।

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