पटना। बिहार के सारण जिले में पुलिस और गैर-सरकारी संगठनों की संयुक्त कार्रवाई में छह आर्केस्ट्रा समूहों से 15 नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया गया। इस दौरान सात आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया।
यह कार्रवाई बिहार पुलिस की मानव तस्करी विरोधी इकाई और गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन (एवीए) एवं नारायणी सेवा संस्थान द्वारा चलाए गए पांच घंटे के संयुक्त अभियान का हिस्सा था।
अभियान के दौरान मुक्त कराई गई लड़कियों के शरीर पर चोट के स्पष्ट निशान थे। जांच में पता चला कि ये लड़कियां पंजाब, ओड़ीसा, असम, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश से तस्करी के जरिए लाई गई थीं। पुलिस ने एक गाड़ी भी जब्त की और सभी लड़कियों को आश्रय गृह भेज दिया।
यह कार्रवाई बिहार के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कमजोर वर्ग, सीआईडी, बिहार पुलिस मुख्यालय) डॉ. अमित कुमार जैन के निर्देश पर सारण के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के आदेश पर हुई। छापे के दौरान विभिन्न आर्केस्ट्रा परिसरों से 12 लड़कियों को मुक्त कराया गया, जबकि खुशी आर्केस्ट्रा के मालिक ने तीन लड़कियों को कार में लेकर भागने की कोशिश की। आठ किलोमीटर तक पीछा करने के बाद उसे पकड़ लिया गया और तीनों नाबालिग लड़कियों को सुरक्षित मुक्त कराया गया।
मुक्त कराई गईं लड़कियों ने पुलिस को बताया कि उन्हें शारीरिक प्रताड़ना और यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ता था और अश्लील गानों पर नाचने के लिए मजबूर किया जाता था। प्राथमिकी (एफआईआर) में उल्लेख है कि, “इन लड़कियों को रात में भीड़ के सामने जबरन अश्लील गानों पर नृत्य कराया जाता था। इन्हें पूरी तनख्वाह नहीं दी जाती थी और इनका शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न किया जाता था।”
अभियान के दौरान जिन आर्केस्ट्रा समूहों पर छापे मारे गए, उनमें काजल आर्केस्ट्रा, सुर संगम आर्केस्ट्रा, कोपा चट्टी आर्केस्ट्रा, खुशी आर्केस्ट्रा, श्याम आर्केस्ट्रा और दिया आर्केस्ट्रा शामिल हैं।
एवीए के वरिष्ठ निदेशक मनीष शर्मा ने कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा, “बिहार पुलिस ने जिस तरह आर्केस्ट्रा समूहों पर शिकंजा कसा है, वह एक नजीर है। ये आर्केस्ट्रा समूह बड़े ट्रैफिकिंग गिरोहों के लिए अहम कड़ी हैं।”
उल्लेखनीय है कि एवीए और नारायणी सेवा संस्थान बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए 250 से अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) के सहयोगी संगठन हैं।
बहरहाल, पुलिस ने सातों आरोपितों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता, पॉक्सो अधिनियम, 2012, किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल व संरक्षण) अधिनियम, 2015, और बंधनुआ मजदूरी उन्मूलन अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।
