जीतेंद्र सिंह कांग्रेस से छह साल के लिए निष्कासित

पूर्वी सिंहभूम। मंगलवार को कांग्रेस के कार्यालय प्रभारी संजय सिंह आजाद ने पत्र जारी कर कार्रवाई की पुष्टि की है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि जीतेंद्र सिंह ने पूर्व में पार्टी में पुनः शामिल होते समय अनुशासित कार्यकर्ता के रूप में कार्य करने का आश्वासन दिया था। यह भी कहा गया कि प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के निर्देशानुसार सभी नेताओं को अधिकृत प्रत्याशी का समर्थन करना अनिवार्य था। जिला पर्यवेक्षक बलजीत सिंह बेदी और जिला अध्यक्ष परविंदर सिंह की अनुशंसा पर यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। बताया जा रहा है कि जीतेंद्र सिंह को इससे पहले भी विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी लाइन के खिलाफ चुनाव लड़ने के कारण निष्कासित किया गया था, हालांकि बाद में उन्हें पुनः संगठन में शामिल कर लिया गया था। ताजा घटनाक्रम को देखते हुए पार्टी ने इस बार सख्त रुख अपनाया है। गौरतलब है कि कांग्रेस ने पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता की पत्नी और अधिकृत प्रत्याशी सुधा गुप्ता के खिलाफ चुनाव लड़ने के मामले में जेबा खान पर भी कार्रवाई करते हुए उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया है। नगर निगम चुनाव में अंदरूनी विरोध को लेकर कांग्रेस संगठन में हलचल तेज हो गई है और पार्टी नेतृत्व ने साफ संकेत दिया है कि अनुशासनहीनता किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मानगो नगर निगम चुनाव के बीच कांग्रेस पार्टी ने अनुशासनहीनता के आरोप में कड़ा कदम उठाते हुए वरिष्ठ नेता जीतेंद्र सिंह को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया है। जीतेंद्र सिंह पर आरोप है कि उन्होंने पार्टी के निर्देशों की अनदेखी करते हुए मेयर पद के लिए कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार सुधा गुप्ता के खिलाफ अपनी पत्नी पार्वती देवी को चुनाव मैदान में उतारा और उनके पक्ष में सक्रिय रूप से प्रचार भी किया। जानकारी के अनुसार, पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि सभी कार्यकर्ता और पदाधिकारी कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी के समर्थन में एकजुट होकर चुनाव प्रचार करें। इसके बावजूद जीतेंद्र सिंह ने न केवल अपनी पत्नी का नामांकन वापस नहीं लिया, बल्कि खुले तौर पर उनके समर्थन में चुनाव अभियान चलाया। इसे पार्टी अनुशासन का गंभीर उल्लंघन माना गया है।

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