नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर जमकर निशाना साधा

रांची। झारखंड विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के जवाब में बजट सत्र के दूसरे दिन गुरूवार काे नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा। सदन में उन्होंने राज्य की बिगडती कानून-व्यवस्था, डीजीपी नियुक्ति, भूमि अधिग्रहण, कृषि नीति, शराब घोटाले पर बगैर चार्चशीट दाखिल आरोपितों को जेल भेजने से लेकर राज्य में भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को उठाते हुए सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए। बाबूलाल की तमाम बातों को सुनने के बाद सीएम हेमंत सोरेन ने सदन में शराब घोटाले पर कहा कि जो बातें न्यायालय में है, उसपर सदन में चर्चा करना सही नहीं। मरांडी ने आगे कहा कि सत्तापक्ष सरकार की ठोस उपलब्धियों की बजाय विषयांतर कर रहा है। जानबूझकर मोदी सरकार और उसकी नीतियों पर सवाल उठा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जसीडीह और संताल परगना क्षेत्र में उद्योग के नाम पर आदिवासी किसानों की खेती योग्य जमीन छीनी जा रही है। लेेकिन यह सोचनीय विषय है कि अंग्रेजों के समय से भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धो कान्हू सहित अन्य शहिदों ने आदिवासी मूलवासियों के जिस जल जंगल और जमीन के मुद्दे पर आंदोलन किया। अपनी जान न्यौछावर की। आज भी उसी मुद्दे पर आदिवासी समुदाय फंसी हुई है। उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए ऐतिहासिक संघर्ष किया गया है, लेकिन आज आदिवासी मूलवासियाें काे उनकी अपनी जमीन से बेदखल करने की कोशिश हो रही है। जसीडीह जमीन मामलों की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी गठित की जाए, जो स्थल निरीक्षण कर जांच कर किसान हित में ठोस निर्णय ले। मामलों की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो विपक्ष आंदोलन शुरू करेगा।

राज्य में डीजीपी नियुक्ति के मुद्दे पर मरांडी ने आरोप लगाया कि नियमों की अनदेखी कर वैसे पदाधिकारी को डीजीपी बना दिया गया है, जो उस पद के लायक ही नहीं था। उन्हाेंने कहा कि राज्य सरकार हमेशा केंद्र से सहयोग न मिलने की बात कहकर अपनी जिम्मेदारियों से नहीं बच सकता। कृषि क्षेत्र की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि धान खरीद लक्ष्य के अनुरूप नहीं हो रही है। वास्तविक किसानों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिचौलियों को संरक्षण दिया जा रहा है। किसानों के खातों में सीधे लाभ पहुंचाने की व्यवस्था प्रभावी नहीं है। हर बार राज्य सरकार धान अधिप्राप्ति पर किसानों को लाभ पहुंचने के दावे करती है। सलाना इसपर खरा नहीं उतर पाती। पिछली बजट से लेकर हर बार 28 प्रतिशत किसानों को ही धान खरीदारी पर सरकार की ओर से लाभ पहुंचने के दावे किए जाते हैं। मरांडी ने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वास्तविक किसानों को ही योजनाओं का लाभ मिले न कि बिचौलियों को।

बीच में रोकटोक करने आए सदस्य इरफान अंसारी ने कहा कि विपक्ष कभी नहीं चाहता है कि रिम्स टू न बनें। जो आंकडे बताया जा रहा है वह सही नहीं है। जिसपर बाबूलाल ने पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष को इस बात से एतराज नहीं है कि राज्यो में रिम्स टू न बनें। लेकिन इस बात पर आपत्ति जरूर है कि खेती योग्य भूमि‍ से 20 किलोमीटर दूरी पर मौजूद बंजर भूमि पर रिम्स टू अस्पताल बनाया जाएमरांडी ने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वास्तविक किसानों को ही योजनाओं का लाभ मिले न कि बिचौलियों को।

किसान प्रभावित न हाे इसका ख्याल रखा जाए। मरांडी ने यह भी कहा कि राज्य में लोकायुक्त, सूचना आयुक्त जैसे संवैधानिक पद सालो से रिक्त पड़े हैं और भ्रष्टाचार रोकने के प्रावधान होने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने कोयला, खनिज और बालू की अवैध निकासी का आरोप लगाते हुए कहा कि सालो पूर्व खनीज निकासी करनेवाली वाहनों में ट्रैकिंग सिस्टम लागू करने की घोषणा की गई है। बावजूद इसके जमीनी स्‍तर पर अबतक पूर्व की घोषणाओं को भी उतारने की दिशा में कदम नहीं उठाए गए। ऐसे कई उदाहरण है जिसपर सदन में सकारात्मक चर्चा करने के बजाए सत्तापक्ष केन्द्र की मोदी सरकार को घेरती है। यदि उसपर चर्चा करना ही है तो सदन उसके लिए दिनभर का समय रखे विपक्ष चर्चा करने को तैयार है। इसके साथ ही विधानसभा अध्यक्ष रबीन्द्रनाथ महतो ने सदन की कार्यवाही 3:25 बजे शाम को अगले दिन शुक्रवार सुबह ग्यारह बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

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