रांची। जयराम महतो ने सदन में कहा कि झारखंड में करीब 15 लाख प्रवासी मजदूर हैं, लेकिन उनमें से केवल 2.29 लाख मजदूरों का ही निबंधन हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राज्य के 80 से 85 प्रतिशत मजदूरों का निबंधन ही नहीं हुआ है, तो उन्हें सरकारी योजनाओं और सहायता का लाभ कैसे मिलेगा। उन्होंने सरकार से पूछा कि सभी प्रवासी मजदूरों के निबंधन के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं और इस दिशा में क्या तैयारी है? इस पर राज्य के श्रम मंत्री संजय यादव ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार मजदूरों के निबंधन को लेकर गंभीर है और इस दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रवासी मजदूरों और उनके परिवारों के साथ खड़ी है। मंत्री ने सदन में बताया कि राज्य के मजदूरों के साथ यदि देश या विदेश में कहीं भी कोई घटना होती है, तो सरकार उन्हें हर संभव सहायता उपलब्ध कराती है। विधायक जयराम महतो ने पूरक प्रश्न में पूछा कि क्या प्रवासी मजदूरों की निगरानी और सहायता के लिए कोई विशेष व्यवस्था की गई है? इस पर मंत्री संजय यादव ने बताया कि प्रवासी मजदूरों के लिए नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है, जो जरूरत पड़ने पर मजदूरों और उनके परिवारों की मदद करता है। सदन में प्रवासी मजदूरों की मौत होने पर उनके परिवारों को पांच लाख रुपये तक मुआवजा देने की मांग भी उठी। इस पर मंत्री संजय यादव ने कहा कि राज्य के बाहर मजदूरों के साथ कोई दुर्घटना होने पर उनके परिवारों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। सरकार इस मांग पर गंभीरता से विचार करेगी और उचित निर्णय लिया जाएगा। विधायक अरुप चटर्जी ने सुझाव दिया कि प्रवासी मजदूरों के लिए केवल निदेशालय (डायरेक्टोरेट) बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इस काम के लिए अलग से अधिकारियों की नियुक्ति की जानी चाहिए। इस पर मंत्री संजय यादव ने बताया कि सरकार ने इस संबंध में कदम उठाए हैं और पांच राज्यों में पदाधिकारियों की नियुक्ति का प्रस्ताव भेजा गया है, ताकि प्रवासी मजदूरों की समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके। मंत्री ने यह भी कहा कि प्रवासी मजदूरों की मौत, विशेषकर आत्महत्या के मामलों में मुआवजा नहीं मिलने की समस्या गंभीर है। इस विषय पर मुख्यमंत्री से चर्चा कर मजदूरों के हित में उचित निर्णय लिया जाएगा।
