बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन का कांग्रेस और नेहरू-गांधी परिवार पर हमला, राष्ट्रीय हितों से समझौते का आरोप

पटना। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष नितिन नवीन ने बुधवार को यहां कांग्रेस और नेहरू-गांधी परिवार पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए उन पर राष्ट्रीय हितों से समझौता करने के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि देश के इतिहास और वर्तमान राजनीति में कांग्रेस नेतृत्व की भूमिका को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।

पत्रकारों से बातचीत में नवीन ने कहा कि भाजपा ‘राष्ट्र प्रथम, पार्टी बाद में और स्वयं सबसे अंत में’ के सिद्धांत पर कार्य करती है, जहां राष्ट्रहित सर्वोपरि है। वहीं उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की राजनीति ‘पहले स्वयं, फिर पार्टी और अंत में देश’ की सोच से संचालित रही है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी अपने पोस्ट में भी उन्होंने यही बात दोहराते हुए कहा कि कांग्रेस ने कई अवसरों पर राष्ट्रहित से समझौता कर व्यक्तिगत स्वार्थ को प्राथमिकता दी। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 1954 में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने तिब्बत में भारत के अधिकार चीन को सौंप दिए थे, जिसे वे देशहित के विपरीत निर्णय बताते हैं।

नवीन ने यह भी दावा किया कि अतीत में कांग्रेस के चुनाव अभियानों में विदेशी फंडिंग को लेकर सवाल उठे थे और इससे राष्ट्रीय हित प्रभावित हुए। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से जुड़े रक्षा सौदों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन मामलों की गंभीरता से जांच होनी चाहिए।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए भाजपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि वे विदेशों में जाकर भारत के खिलाफ बयान देते हैं और विदेशी प्रभाव में राजनीति करते हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष की भूमिका जिम्मेदारीपूर्ण होनी चाहिए।

नवीन ने वर्ष 2004 से 2014 तक संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय वास्तविक सत्ता संरचना को लेकर भी सवाल उठे थे और राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के माध्यम से समानांतर व्यवस्था चलने की चर्चा रही।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को ऐतिहासिक निर्णयों और अपने रुख को लेकर देश के सामने स्पष्ट जवाब देना चाहिए। नवीन ने दावा किया कि जनता अब इन मुद्दों को समझ रही है और आने वाले समय में इसका राजनीतिक असर दिखाई देगा।

गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस द्वारा केंद्र सरकार पर लगातार आरोप लगाए जा रहे हैं और दोनों दलों के बीच राजनीतिक टकराव तेज होता जा रहा है।

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