पटना/रक्सौल। विदेशी घुसपैठ के खात्मे को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बिहार दौरे के बीच भारत–नेपाल की खुली सीमा एक बार फिर चर्चा में है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार खेत, झाड़-झंखाड़, नदियों और पगडंडियों के रास्ते बरास्ता नेपाल घुसपैठ की कोशिशें लगातार सामने आ रही हैं। सीमावर्ती बिहार के सात जिलों—पूर्वी व पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज—में समय-समय पर संदिग्धों की धरपकड़ हुई है।
हालिया पकड़ियां
1 जनवरी 2025, रक्सौल मैत्री पुल: तीन बांग्लादेशी नागरिक—शाहिनुर रहमान, मो. सबुज और मो. फिरोज—फर्जी भारतीय वीजा के साथ पकड़े गए। एक भारतीय नागरिक सरफराज अंसारी पर सहयोग का आरोप है।
10 जनवरी 2025: श्रीलंकाई नागरिक मो. हनिफ, केरल निवासी कानोथ रसीद के साथ हिरासत में लिया गया।
2025 में रक्सौल इमिग्रेशन चेकपोस्ट: अमेरिका, चीन, कनाडा, कोरिया, नाइजीरिया, सूडान और यूएई के 16 विदेशी नागरिक बिना वैध दस्तावेज प्रवेश की कोशिश में पकड़े गए।
सितंबर 2025: चार सूडानी और एक बोलिवियाई नागरिक के पास उर्दू में लिखे संदिग्ध कोड व मानचित्र मिलने का दावा।
पुराने मामले भी रहे चर्चा में
वर्ष 2013 में इंडियन मुजाहिदीन के सरगना यासीन भटकल और असदुल्ला अख्तर को रक्सौल क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया था। 2018 में सिमी के दो सदस्य भी इसी इलाके से पकड़े गए। 2025 में कनाडाई नागरिक हरप्रीत की गिरफ्तारी ने भी सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क किया।
सीमावर्ती इलाकों में अतिक्रमण की शिकायत
अररिया जिले के बसमतिया गांव के समाजसेवी अशोक कुमार का कहना है कि नो-मैन्स-लैंड के आसपास अतिक्रमण की घटनाएं बढ़ी हैं। “रातों-रात कच्चे मकान खड़े हो जाते हैं और बाद में मुहल्लों के नाम रख दिए जाते हैं,” उन्होंने दावा किया। पूर्णिया, किशनगंज और अररिया के कुछ इलाकों में नए बसे मोहल्लों को लेकर स्थानीय स्तर पर जांच की मांग उठी है।
एजेंसियां अलर्ट
सुरक्षा एजेंसियां सीमा पर निगरानी बढ़ाने, इंटेलिजेंस समन्वय मजबूत करने और दस्तावेज़ सत्यापन प्रक्रिया सख्त करने की बात कह रही हैं। गृह मंत्रालय के स्तर पर समीक्षा बैठकें जारी हैं। अधिकारियों का कहना है कि खुली सीमा की व्यवस्था दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों का हिस्सा है, लेकिन दुरुपयोग रोकने के लिए तकनीकी व मानव संसाधन दोनों स्तर पर कदम तेज किए जा रहे हैं।
