Jharkhand Mukti Morcha का केंद्र पर हमला, Bharatiya Janata Party ने बताया भ्रम फैलाने की कोशिश; SIR और Hemant Soren मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सियासत तेज

रांची ; सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीएम हेमंत सोरेन के खिलाफ ईडी की कार्रवाई पर रोक और एसआईआर पर दिए गए फैसले से झामुमो नेता काफी खुश हैं. झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि एसआईआर में जो त्रुटियां थी, उसे बंगाल सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सबसे पहले सामने लाया है.

उन्होंने कहा कि वहां की मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट में जिन बातों की ओर इशारा किया, उसके जरिए उन्होंने बता दिया कि केंद्र की बीजेपी सरकार राजनीतिक लड़ाई नहीं लड़ती, वह चुनाव लड़ने के लिए एजेंसियों को लगाती है. सुप्रीम कोर्ट ने भी माना और कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया न्यायिक प्रक्रिया से गुजरेगा । सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि चुनाव आयोग ने अपनी विश्वसनीयता खो दी है. झारखंड में एसआईआर अप्रैल में होनी है. उन्होंने कहा, “हमें भी यही आशंका है कि बिहार में जो साजिश हुई, जिसमें विशेष भाषाएं बोलने, पहनने या खाने वाले लोगों को बाहरी बताया गया और वोटर लिस्ट से नाम हटाए गए, उसका पर्दाफाश बंगाल में हुआ. हम बिहार जैसा एसआईआर झारखंड में नहीं होने देंगे.” एसआईआर के नाम पर बंगाली भाषी, अल्पसंख्यक और दलित वर्ग को डिलीशन का मंसूबा है. अगर ऐसा काम किया गया तो यहां भी एसआईआर की स्थिति बंगाल जैसी होगी.भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने झामुमो की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर कड़ा जवाब दिया. उन्होंने कहा कि तथ्यों को तोड़-मरोड़कर जनता को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल वोटर लिस्ट मामले में न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति का सुप्रीम कोर्ट का फैसला अत्यंत गंभीर परिस्थितियों में लिया गया, वहां वोटर लिस्ट में लगभग 80 लाख विसंगतियां पाई गई थीं. यह फैसला स्थानीय प्रशासन की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को लेकर कोर्ट की चिंता और अविश्वास को स्पष्ट रूप से दर्शाता है.उन्होंने कहा कि जब लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया, चुनाव की पवित्रता पर सवाल उठता है तो न्यायपालिका को हस्तक्षेप करना पड़ता है. ऐसे संवेदनशील विषय को राजनीतिक लाभ के लिए तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करना लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ खिलवाड़ है.

प्रतुल शाहदेव ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के लिए ऐतिहासिक राहत का झामुमो का दावा पूरी तरह से भ्रामक और तथ्यों से परे है. उन्होंने साफ किया कि मुख्यमंत्री को सिर्फ समन की अवहेलना के टेक्निकल मामले में राहत मिली है, जबकि कथित भूमि घोटाले से जुड़ा मूल आपराधिक मामला अभी भी चल रहा है.

प्रतुल ने कहा कि जनता को गुमराह करने के लिए आधे-अधूरे सच को ऐतिहासिक जीत कहना राजनीतिक ईमानदारी के खिलाफ है. अगर मुख्यमंत्री बेगुनाह हैं, तो उन्हें पूरी जांच प्रक्रिया का सामना करना चाहिए और कानूनी प्रक्रियाओं का इस्तेमाल राजनीतिक ढाल के तौर पर नहीं करना चाहिए. उन्होंने यह कहते हुए बात खत्म की कि भाजपा न्यायपालिका का सम्मान करती है और कानून के राज में विश्वास करती है, जबकि झामुमो अदालत के फैसलों को राजनीतिक चश्मे से देख रहा है. झारखंड के जनता सच्चाई जानती है और भ्रम फैलाने की राजनीति को स्वीकार नहीं करेगी.

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