ग्रामीण उद्यमियों के उत्पादों को बेहतर मंच देने लिए अन्य जिलों में भी लगेगा सरस मेला : ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह

रांची। रांची के मोरहाबादी मैदान में सोमवार को राजकीय हस्तकरघा और सरस मेला का भव्य शुभारंभ सोमवार को किया गया। सरस मेला का उद्घाटन उद्योग मंत्री संजय यादव और ने संयुक्त रूप से किया। यह मेला 09 मार्च से 20 मार्च तक आम लोगों के लिए खुला रहेगा। मेले में देश के विभिन्न राज्यों से आए कारीगरों और उद्यमियों के करीब 620 स्टॉल लगाए गए हैं, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

मेले में झारखंड सहित देश के कई राज्यों के हस्तकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों की विविधता देखने को मिल रही है। यहां पारंपरिक वस्त्र, तसर और सिल्क के परिधान, हैंडलूम साड़ियां, लकड़ी और बांस से बने उत्पाद, जूट के सामान, हस्तनिर्मित सजावटी वस्तुएं, घरेलू उपयोग की चीजें और कई तरह के पारंपरिक उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं।

ऐसे मेलों के जरिए हुनर को प्रदर्शित करने का मौका

इस मेले में झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों से आए स्वयं सहायता समूहों और कारीगरों को भी अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने और बेचने का अवसर मिला है।

मेला शुरू होते ही बड़ी संख्या में लोग मोरहाबादी मैदान पहुंच रहे हैं और विभिन्न स्टॉलों पर खरीदारी कर रहे हैं। राजधानी के लोगों के लिए यह मेला खरीदारी के साथ-साथ पारंपरिक कला और संस्कृति से जुड़ने का भी अवसर बन गया है। मेले में अलग-अलग राज्यों की झलक देखने को मिल रही है, जहां कारीगर अपने-अपने क्षेत्र की विशेष कला और उत्पादों को लेकर पहुंचे हैं।

मेले में पहुंचे कई उद्यमियों और कारीगरों का कहना है कि इस तरह के आयोजन उनके लिए बेहद फायदेमंद साबित होते हैं। उन्हें अपने उत्पादों को सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने और नए बाजार से जुड़ने का अवसर मिलता है। इससे उनकी आय बढ़ने के साथ-साथ उनकी कला को भी पहचान मिलती है।

वहीं कई कारीगरों का कहना है कि ऐसे मेलों के जरिए उन्हें अपने हुनर को प्रदर्शित करने और नए ग्राहक बनाने का मौका मिलता है, इससे उनके व्यवसाय को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है।

इस अवसर पर ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि राज्य सरकार हस्तशिल्प, हस्तकरघा और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि झारखंड के ग्रामीण कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों की ओर से तैयार किए जा रहे उत्पादों की गुणवत्ता काफी अच्छी है और उन्हें व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार काम कर रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि रांची में इस तरह के आयोजनों की सफलता को देखते हुए राज्य के अन्य जिलों में भी सरस मेला और हस्तकरघा मेले आयोजित किए जाएंगे, ताकि ग्रामीण उद्यमियों और कारीगरों को अपने उत्पादों की बिक्री के लिए बेहतर मंच मिल सके।

मंत्री ने कहा कि यह मेला उद्यमियों के लिए जहां लाभकारी साबित हो रहा है, वहीं खरीदारी करने वाले लोगों के लिए भी एक नया अनुभव है। यहां देश के विभिन्न राज्यों के हस्तशिल्प और लघु उद्योग उत्पादों का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। यही कारण है कि मेला लोगों के बीच खासा लोकप्रिय हो रहा है और बड़ी संख्या में लोग इसका आनंद लेने पहुंच रहे हैं।

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