पारिवारिक पेंशन में देरी पर झारखंड हाई कोर्ट का कड़ा रुख, पेंशन समिति व ट्रस्टियों को नोटिस

रांची। झारखंड उच्च न्यायालय ने विधवा द्वारा दायर पारिवारिक पेंशन याचिका पर सुनवाई करते हुए झारखंड एडवोकेट्स वेलफेयर पेंशन कमेटी और ट्रस्टी कमेटी को नोटिस जारी किया है। अदालत ने दोनों पक्षों को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

यह याचिका झारखंड एडवोकेट्स वेलफेयर (पेंशन एवं फैमिली पेंशन) नियम, 2012 के तहत दायर की गई है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आनंदा सेन की पीठ में हुई।

याचिकाकर्ता विधवा ने आरोप लगाया कि उनके पति की मृत्यु के बाद पारिवारिक पेंशन स्वीकृत करने में दो वर्षों से अधिक की अनावश्यक देरी की गई। सुनवाई के दौरान झारखंड स्टेट बार काउंसिल ने अदालत में उपस्थित होकर याचिकाकर्ता के दावे का समर्थन किया और कहा कि उन्हें पेंशन का अधिकार है।

याचिकाकर्ता के पति धनबाद न्यायालय क्षेत्र में अधिवक्ता थे और धनबाद बार एसोसिएशन के सदस्य थे। उन्होंने अगस्त 2022 में 10,000 रुपये की एकमुश्त राशि देकर पेंशन फंड की सदस्यता ली थी और झारखंड बार काउंसिल जर्नल के सदस्य भी थे। नवंबर 2023 में उनके निधन के बाद विधवा ने नियम 15(4) के तहत निर्धारित फार्म-डी में सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन किया, लेकिन अब तक पेंशन स्वीकृत नहीं हुई।

याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में पेंशन के बकाया भुगतान के साथ 12 प्रतिशत ब्याज देने की मांग की गई है। साथ ही यह भी कहा गया है कि इतनी देरी अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन है। नियम 14(3) के तहत मृत अधिवक्ता की पत्नी को पारिवारिक पेंशन का अधिकार बताया गया है।

मामले की अगली सुनवाई नोटिस अवधि पूरी होने के बाद होगी। याचिकाकर्ता जाकिया खातून की ओर से अधिवक्ता मोहम्मद शादाब अंसारी ने पक्ष रखा।

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