रांची/हजारीबाग। झारखंड उच्च न्यायालय ने हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र में 12 वर्षीय बच्ची के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इस जघन्य घटना पर स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका (पीआईएल) के रूप में दर्ज करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति अनुभा रावत चौधरी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस की धीमी कार्रवाई पर गहरी चिंता जताई। कोर्ट को बताया गया कि 24 मार्च को घटना होने के बाद 25 मार्च को प्राथमिकी दर्ज की गई, लेकिन पांच दिन बीत जाने के बावजूद किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। इस पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई।
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि पीड़िता से जुड़े महत्वपूर्ण नमूने एकत्र किए जाने के बावजूद उन्हें अब तक फॉरेंसिक जांच के लिए नहीं भेजा गया है। अदालत ने इस लापरवाही को गंभीर मानते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब करने के संकेत दिए हैं।
गिरफ्तारी नहीं होने पर 3 अप्रैल को झारखंड बंद की चेतावनी
इधर, हजारीबाग के विष्णुगढ़ में बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने पर भाजपा ने आंदोलन की चेतावनी दी है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदित्य साहू ने सोमवार को कहा कि यदि 2 अप्रैल तक सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती है, तो 3 अप्रैल को झारखंड बंद कराया जाएगा।
उन्होंने बताया कि 2 अप्रैल को राज्य के सभी जिला व प्रखंड मुख्यालयों में मशाल जुलूस निकालकर विरोध दर्ज कराया जाएगा।
