मालदा/कोलकाता: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में मतदाता सूची (Voter List) को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन बुधवार को हिंसक संघर्ष में बदल गया। कालियाचक-2 ब्लॉक ऑफिस में उस वक्त हड़कंप मच गया जब उग्र प्रदर्शनकारियों ने विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) कार्य में जुटे सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बना लिया। करीब 8 घंटे तक चले इस ‘बंधक ड्रामे’ के बाद आधी रात को पुलिस ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला।
महिलाओं सहित 7 अधिकारियों पर टूटा भीड़ का गुस्सा
घटना बुधवार दोपहर उस वक्त शुरू हुई जब कालियाचक, मोथाबाड़ी और सुजापुर से आए सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने ब्लॉक कार्यालय को चारों तरफ से घेर लिया। बंधक बनाए गए अधिकारियों में तीन महिला अधिकारी भी शामिल थीं। भीड़ इतनी उग्र थी कि उसने न सिर्फ कार्यालय का घेराव किया, बल्कि नेशनल हाईवे-12 को भी जाम कर दिया। अधिकारियों को बचाने पहुंची पुलिस पर भी पथराव किया गया, जिसमें कई वाहनों के शीशे चकनाचूर हो गए।
क्यों भड़का लोगों का गुस्सा?
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उनके पास सभी वैध दस्तावेज (Valid Documents) होने के बावजूद मतदाता सूची से उनके नाम काट दिए गए हैं। प्रदर्शन में शामिल अधिकांश लोग अल्पसंख्यक समुदाय से थे और खुद को सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) का समर्थक बता रहे थे। उनकी मांग थी कि चुनाव से पहले वोटर लिस्ट की गलतियों को तुरंत सुधारा जाए।
मिडनाइट रेस्क्यू: पुलिस के काफिले पर हमला
जैसे-जैसे रात गहराती गई, स्थिति तनावपूर्ण होती गई। भारी पुलिस बल ने आधी रात के बाद मोर्चा संभाला। जब पुलिस अधिकारियों को सुरक्षा घेरे में बाहर निकाल रही थी, तब भीड़ ने काफिले पर हमला करने की कोशिश की। कड़ी मशक्कत और कई दौर की बातचीत के बाद अधिकारियों को वहां से निकाला जा सका। फिलहाल इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है और ‘हाई अलर्ट’ की स्थिति बनी हुई है।
सियासी घमासान: BJP vs TMC
इस हिंसा ने बंगाल की राजनीति में फिर से आग लगा दी है:
- बीजेपी का आरोप: केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने हमलावर रुख अपनाते हुए कहा कि सीएम ममता बनर्जी के उकसावे वाले बयानों के कारण सरकारी अधिकारियों की जान खतरे में पड़ी है।
- टीएमसी का जवाब: टीएमसी नेता कुणाल घोष ने घटना से पल्ला झाड़ते हुए इसके लिए चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया और भाजपा पर अशांति फैलाने का आरोप लगाया।
