लक्ष्मी एवं विष्णु की आराधना का विशेष पर्व है यह अक्षय तृतीया
अक्षय तृतीया का अत्यंत पवित्र तथा पुण्यफलदायक पर्व तृतीया तिथि में सोमवार यानी 20 अप्रैल को मनाया जाएगा। अक्षय का शाब्दिक अर्थ है- जिसका क्षय नहीं हो। जो अक्षय,अविनाशी,अखंडित,स्थायी और सदैव पूर्ण हो। प्रत्येक वर्ष में एक ही तिथि है वैशाख शुक्लपक्ष की तृतीया,इसे ही अक्षय तृतीया या आखातीज कहते हैं। उक्त जानकारी आर्षविद्या शिक्षण प्रशिक्षण सेवा संस्थान-वेद विद्यालय के प्राचार्य सुशील कुमार पाण्डेय ने दी। उन्होंने बताया कि इस दिन स्थायी और स्थिर कार्य प्रारंभ करना तथा सोना,चाँदी व बहुमूल्य रत्न आदि खरीदना एवं संचित करना वृद्धिकारी और शुभफलदायक माना जाता है। इस दिन का दिया गया किसी प्रकार का दान अक्षय फलकारी होता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार अक्षय तृतीया का पर्व लक्ष्मी एवं विष्णु की आराधना का विशेष पर्व है। इसका भी एक कारण है- जिस तरह सामाजिक व्यवस्था को संतुलित बनाए रखने के लिए धर्मार्थकाममोक्ष इन चारों पुरुषार्थों की आवश्यकता है तथा एक दूसरे के पूरक भी हैं। इसी तरह यदि भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी आतीं हैं तो सौम्य रूप में आतीं हैं,वरना लक्ष्मी तो चंचला हैं। अक्षय तृतीया की तिथि को ईश्वर तिथि भी कहते हैं। इसदिन सुहागिन महिलायें व कन्यायें गौरी पूजन भी करतीं हैं। अक्षय तृतीया आत्म निरीक्षण व आत्म अवलोकन का भी दिन है।

