नई दिल्ली/नोएडा : नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में हुए मजदूर आंदोलन के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ‘ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन’ (AIALU) और छात्र-युवा संगठनों की फैक्ट फाइंडिंग टीम ने अपनी रिपोर्ट जारी करते हुए दावा किया है कि पुलिस ने कार्रवाई के नाम पर संवैधानिक मर्यादाओं को ताक पर रख दिया है।
साढ़े तीन सौ नाबालिग भी हिरासत में?
रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला दावा नाबालिगों की गिरफ्तारी को लेकर किया गया है। टीम के मुताबिक, चश्मदीदों ने बताया कि लगभग 800 लोगों के साथ-साथ 350 नाबालिगों को भी पकड़ा गया है। इनमें से कई बच्चे उस वक्त उठाए गए जब वे ट्यूशन से लौट रहे थे या बाजार में सामान खरीद रहे थे। एआईएलयू दिल्ली के सचिव सुनील कुमार ने बताया कि अभी तक गिरफ्तार लोगों की आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है।
फैक्ट्री प्रबंधन और पुलिस की ‘मिलीभगत’ के आरोप
रिपोर्ट में कहा गया है कि 15 से 17 अप्रैल के बीच कई मजदूरों को उनके कार्यस्थल से ही गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि फैक्ट्री प्रबंधकों ने मजदूरों को काम पर बुलाया और वहां पहले से मौजूद सादी वर्दी में पुलिसकर्मियों ने उन्हें हिरासत में ले लिया। टीम ने इसे पूरी तरह से अन्यायपूर्ण और प्रबंधन के इशारे पर की गई कार्रवाई बताया है।
परिजनों को नहीं दी जानकारी, जेलों के चक्कर काट रहे लोग
जांच दल ने इस बात पर गहरी चिंता जताई है कि गिरफ्तार किए गए लोगों के परिवारों को कोई सूचना नहीं दी गई। कई लोगों को CRPC की धारा 151 के तहत पकड़ा गया, लेकिन उनका पता नहीं चल रहा है। लोग अपने परिजनों की तलाश में थाने से लेकर कासना जेल तक की दौड़ लगा रहे हैं। संवैधानिक उल्लंघन का आरोप: रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि नोएडा पुलिस ने गिरफ्तारी की वजह न बताकर और परिजनों को सूचित न करके सीधे तौर पर संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन किया है। फैक्ट फाइंडिंग टीम ने इस मामले में निष्पक्ष जांच और निर्दोषों की तत्काल रिहाई की मांग की है।
