चंडीगढ़ : पिछले हफ्ते सोशल मीडिया पर अचानक चर्चा में आई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का ‘एक्स’ अकाउंट को भारत में बैन कर दिया गया था। यह वही अकाउंट था जिसने कम समय में बड़ी संख्या में फॉलोअर्स जुटाकर सुर्खियां बटोरी थीं। हालांकि अकाउंट बंद होने के बाद ऑनलाइन बहस और तेज हो गई।
रोक के कुछ ही देर बाद संगठन ने एक नया अकाउंट ‘कॉकरोच इज बैक’ नाम से शुरू कर दिया। इसकी टैगलाइन थी- “कॉकरोच मरता नहीं है।” कुछ ही घंटों में इस नए हैंडल पर भी हजारों लोग जुड़ गए और इसकी चर्चा फिर से सोशल मीडिया पर फैल गई।
संस्थापक अभिजीत डुबके ने दावा किया कि यह कार्रवाई पहले से ही अनुमानित थी। उनके अनुसार, अकाउंट को हैक करने की कोशिशें भी हो रही थीं। यह आंदोलन को दबाने की कोशिश है, लेकिन इससे उनका काम रुकने वाला नहीं है। बता दें कि पहले वाले अकाउंट पर करीब 2 लाख फॉलोअर थे, जबकि इंस्टाग्राम पर यह संख्या लाखों में पहुंच गई थी। कुछ पोस्ट में इसे अन्य बड़े राजनीतिक पेजों से भी तुलना की गई, जिससे यह और ज्यादा वायरल हो गया।
यह आंदोलन तब शुरू हुआ जब सीजेआई सूर्यकांत ने बेरोजगार युवाओं की तुलना ‘कॉकरोच’ से कर दी थी। हालांकि उन्होंने बाद में कहा कि उनका बयान फर्जी डिग्री लेने वालों के लिए था लेकिन तब त सीजेपी वायरल हो चुकी थी। कुछ लोगों ने इसे अभिव्यक्ति की आजादी बताया, तो कुछ ने इसे सिर्फ एक सोशल मीडिया ट्रेंड कहा।
फिलहाल ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ एक औपचारिक राजनीतिक दल से ज्यादा एक डिजिटल आंदोलन के रूप में देखी जा रही है। अकाउंट बंद होने और नए हैंडल बनने के बाद इसका विवाद और बढ़ गया है। आने वाले दिनों में यह कितना आगे जाएगा, यह देखना बाकी है।
