लखनऊ। लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर अग्निकांड में 14 लोगों की मौत के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में भवन मालिक समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि नगर निगम, ऊर्जा विभाग और फायर विभाग के चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरे प्रकरण की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है।
चार आरोपित गिरफ्तार
अलीगंज पुलिस ने देर रात मुकदमा दर्ज कर चार लोगों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपितों में अलीगंज सेक्टर-डी निवासी रामकृष्ण उपाध्याय, सीतापुर रोड निवासी वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, ठाकुरगंज निवासी तुषॉक कृष्णा जायसवाल और केशवनगर निवासी सुरेश कुमार साहू शामिल हैं।
चार अधिकारी निलंबित
मुख्यमंत्री के निर्देश पर बिजली विभाग के जानकीपुरम एक्सईएन कलेक्शन गौरव कुमार, फायर विभाग के एफएसएसओ कमलेन्द्र कुमार सिंह, लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के एई अनिल कुमार और जेई प्रमोद पांडे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
7 दिन में रिपोर्ट देगी एसआईटी
मुख्यमंत्री आवास पर हुई हाईलेवल बैठक में दो सदस्यीय विशेष जांच दल के गठन का निर्णय लिया गया। एसआईटी में अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और एडीजी लखनऊ जोन प्रवीण कुमार को शामिल किया गया है। टीम को सात दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
2016 में जारी हुआ था ध्वस्तीकरण आदेश
जांच में सामने आया है कि जिस इमारत में आग लगी, उसके खिलाफ वर्ष 2016 में अवैध निर्माण को लेकर ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया था। हालांकि, यह आदेश दो महीने के भीतर ही निरस्त कर दिया गया था।
1980 में हुआ था भवन का आवंटन
अलीगंज योजना के सेक्टर-डी स्थित भवन संख्या एमएस/102/डी का आवंटन वर्ष 1980 में हुआ था। बाद में यह भवन कई बार स्वामित्व परिवर्तन के बाद वर्ष 2014 में वर्तमान मालिकों के नाम दर्ज हुआ। उसी वर्ष आवासीय उपयोग के लिए मानचित्र भी स्वीकृत किया गया था।
ध्वस्तीकरण आदेश निरस्त होने पर सवाल
एलडीए ने वर्ष 2016 में अनधिकृत निर्माण पाए जाने पर ध्वस्तीकरण का आदेश पारित किया था, लेकिन 5 जुलाई 2016 को इसे निरस्त कर दिया गया। अब इस फैसले और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। जांच एजेंसियां इस पूरे मामले की पड़ताल कर रही हैं।
