तेल अवीव। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक बार फिर मध्य पूर्व (Middle East) में जारी संघर्ष को लेकर बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। मंगलवार को दिए एक विशेष साक्षात्कार में नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि ईरान और उसके सहयोगी संगठनों (हमास व हिजबुल्लाह) के खिलाफ “पूरी जीत” हासिल करने की इजराइल की कोशिश “कभी खत्म नहीं होगी”। उन्होंने पिछले तीन वर्षों में इजराइली सेना की उपलब्धियों की तारीफ करते हुए कहा कि दुश्मनों का सफाया करने के लिए अभी और बड़े कदम उठाए जाने बाकी हैं।
दुश्मन हुए कमजोर, इजराइल पहले से ज्यादा मजबूत
इजराइली मीडिया ‘द टाइम्स ऑफ इजराइल’ की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने टीवी चैनल ‘चैनल 14’ को दिए इंटरव्यू में यह बातें कहीं। जब उनसे पूछा गया कि क्या गाजा युद्ध के शुरुआती दिनों में “पूरी जीत” हासिल करने का उनका वादा आज भी कायम है? तो नेतन्याहू ने दोटूक कहा, “यह लड़ाई कभी खत्म नहीं होने वाली प्रक्रिया है।” उन्होंने दावा किया कि आज इजराइल रणनीतिक रूप से पहले से कहीं ज्यादा मजबूत स्थिति में है और उसने अपने तमाम दुश्मनों को बेहद कमजोर कर दिया है।
नेताओं के सफाए और बफर जोन बनाने की तारीफ, लेकिन एक कसक बाकी
प्रधानमंत्री ने हमास, हिजबुल्लाह और ईरान के शीर्ष सैन्य व राजनीतिक कमांडरों को मार गिराने की सैन्य कार्रवाइयों को अपनी बड़ी कामयाबी बताया। इसके साथ ही उन्होंने गाजा, लेबनान और सीरिया की सीमाओं पर सुरक्षित ‘बफर जोन’ बनाने के सरकार के फैसलों की भी सराहना की।
हालांकि, उन्होंने खुले तौर पर यह भी स्वीकार किया कि ईरान के सीधे संदर्भ में युद्ध के नतीजे उन बड़े और पक्के लक्ष्यों से थोड़े कमतर रहे जो इजराइल ने शुरू में तय किए थे। इनमें मुख्य रूप से ईरान के न्यूक्लियर (परमाणु) व मिसाइल प्रोग्राम को पूरी तरह नेस्तनाबूद करना और वहां सत्ता परिवर्तन (Regime Change) में मदद करना शामिल था।
सऊदी और लेबनान के साथ शांति समझौते के संकेत
साक्षात्कार के दौरान जब नेतन्याहू से पूछा गया कि क्या इजराइल आने वाले दिनों में सऊदी अरब या किसी अन्य अरब देश के साथ ऐतिहासिक शांति समझौते करने की उम्मीद कर रहा है? तो प्रधानमंत्री ने रणनीतिक कारणों से सीधे तौर पर देशों के नाम सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया, लेकिन एक बड़ा संकेत जरूर दिया।
नेतन्याहू ने कहा: “कई महत्वपूर्ण देश इस समय शांति और गठबंधन की दौड़ में शामिल हैं, जिनमें लेबनान भी है। मैं अभी सबके नाम नहीं ले रहा क्योंकि मैं सीधे नतीजे दिखाना चाहता हूं। लेबनान के साथ एक ऐसी कूटनीतिक समझ बनी है जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। दूसरे देशों के साथ भी हमारे बैक-चैनल संपर्क लगातार जारी हैं। दुनिया का सीधा नियम है—जब आप सैन्य रूप से बेहद मजबूत होते हैं, तो लोग खुद आपके साथ गठबंधन करते हैं और शांति समझौता करने आगे आते हैं।”
