अमेरिका और ईरान ने ‘डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल’ के लिए नियुक्त किए दूत, घालीबाफ का दावा

तेहरान। लेबनान में जारी भारी तनाव को कम करने और किसी भी संभावित सैन्य टकराव को टालने की दिशा में एक बड़ी और ऐतिहासिक कूटनीतिक प्रगति सामने आई है। ईरानी संसद (मज्लिस) के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर घालीबाफ ने बड़ा एलान करते हुए कहा है कि अमेरिका और ईरान ने लेबनान में शांति स्थापित करने और दोनों देशों के बीच गलतफहमियों को दूर करने के लिए विशेष दूत नियुक्त किए हैं। इस विशेष ‘लेबनान डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल’ (टकराव रोकने वाली इकाई) का मुख्य उद्देश्य सैन्य मोर्चे पर सीधे टकराव को रोकना और क्षेत्र में युद्धविराम को बनाए रखना है।

स्विट्जरलैंड में हुई ऐतिहासिक वार्ता का नतीजा

अंतर्राष्ट्रीय मीडिया नेटवर्क ‘अल जजीरा’ की रिपोर्ट के अनुसार, यह महत्वपूर्ण नियुक्तियां स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में अमेरिका और ईरान के बीच हुई पर्दे के पीछे की ऐतिहासिक वार्ता के बाद संभव हो सकी हैं। इस उच्चस्तरीय वार्ता में दोनों महाशक्तियों के बीच लेबनान में तनाव को कम करने और युद्धविराम का कड़ाई से पालन कराने के लिए एक संयुक्त ‘डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल’ के गठन पर सहमति बनी थी।

ईरानी संसद अध्यक्ष की अमेरिका को दोटूक: माननी होंगी 5 शर्तें

ईरान के सरकारी चैनल ‘प्रेस टीवी’ को दिए एक विशेष साक्षात्कार में संसद अध्यक्ष घालीबाफ ने स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ आगे की बातचीत और समझौता तभी मुकम्मल होगा, जब उनके बीच हुए सहमति पत्र (MoU) की 5 अनिवार्य शर्तों को पूरी तरह लागू किया जाएगा। इन शर्तों में मुख्य रूप से शामिल हैं:

  1. लेबनान में चल रहे सैन्य संघर्ष और युद्ध को तुरंत पूरी तरह रोकना।
  2. अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ईरानी कच्चे तेल के निर्यात (Export) को सुरक्षित और निर्बाध बनाना।
  3. विभिन्न देशों के बैंकों में फ्रीज (जब्त) की गई ईरान की अरबों डॉलर की संपत्ति को तत्काल जारी करना।

घालीबाफ ने तर्क दिया कि इस ईरान-अमेरिका समझौते का मूल उद्देश्य लेबनान की संप्रभुता और उसकी आज़ादी की रक्षा करना है।

‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ पर समझौता: ईरान ने कहा- संप्रभुता से समझौता नहीं

साक्षात्कार के दौरान घालीबाफ ने एक और बड़े समझौते की जानकारी देते हुए कहा कि ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में समुद्री सेवाओं के प्रशासन और उससे जुड़े सभी कानूनी व सेवा संबंधी मामलों पर एक सहमति बन चुकी है।

  • ताकत का जरिया: घालीबाफ ने कड़े लहजे में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान की रणनीतिक और सैन्य ताकत का सबसे बड़ा जरिया है और ईरान इस जलमार्ग पर अपनी पूर्ण संप्रभुता बनाए रखेगा।
  • अस्थायी छूट: नए समझौते के तहत इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों को समुद्री सेवा शुल्क (मैरीटाइम सर्विस फी) से केवल 60 दिनों की अस्थायी छूट दी जाएगी।
  • सैन्यीकरण के आरोपों पर पलटवार: उन्होंने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा, “ये हमारे क्षेत्रीय जल क्षेत्र हैं। हम अमेरिका को यह झूठा दावा करके विवाद पैदा करने की इजाजत नहीं देंगे कि ईरान ने होर्मुज का सैन्यीकरण कर दिया है। यह जलमार्ग ईरान के लिए ईश्वर का दिया हुआ तोहफा है और ईरान अपने इस रुख से एक इंच भी पीछे नहीं हटेगा।”

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