नई दिल्ली। देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के दुरुपयोग को रोकने के लिए केंद्र सरकार अब एक बड़े और सख्त कानून की तैयारी में है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि डीपफेक, एआई-जनित साइबर अपराधों और मैसेजिंग ऐप्स के ‘यूजरनेम फीचर’ से पैदा होने वाले खतरों से निपटने के लिए अब एक नए और कड़े नियामक ढांचे (Regulatory Framework) की जरूरत है।
मौजूदा IT एक्ट नहीं है काफी, नए कानून पर मंथन शुरू
साइबर सुरक्षा समिट के दौरान आईटी सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि वर्तमान में डीपफेक, फर्जी ऑडियो-वीडियो और एआई से जुड़ी अन्य चुनौतियों पर लगाम लगाने के लिए मौजूदा आईटी कानूनों का सहारा लिया जा रहा है। हालांकि, एआई तकनीक जिस तीव्र गति से आगे बढ़ रही है, उसे देखते हुए अब एक स्वतंत्र और अतिरिक्त कानून समय की मांग बन चुका है। सरकार में इस नए एआई कानून को लेकर उच्चस्तरीय चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं।
WhatsApp, Telegram और Signal को नोटिस
सरकार ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर बिना मोबाइल नंबर के केवल ‘यूजरनेम’ के जरिए चैट करने की सुविधा (Username Feature) पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है।
- साइबर ठगी का खतरा: आईटी सचिव ने कहा कि यूजरनेम फीचर का दुरुपयोग कर साइबर अपराधी अपनी असली पहचान छिपाकर लोगों की नकल (Impersonation) कर रहे हैं, जिससे ‘डिजिटल अरेस्ट’ और वित्तीय धोखाधड़ी जैसे अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं।
- जवाब तलब: टेलीग्राम और सिग्नल पर यह फीचर पहले से है, जबकि व्हाट्सएप भी इसे लाने की तैयारी में है। सरकार ने इन तीनों कंपनियों को नोटिस जारी कर इस सुरक्षा जोखिम पर जवाब मांगा है। यह मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में भी है।
चाइल्ड एब्यूज विज्ञापनों पर मेटा (Meta) को समन
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव के निर्देश पर मंत्रालय ने सोशल मीडिया दिग्गज ‘मेटा’ (Meta) को समन जारी करने का फैसला किया है। यह कार्रवाई एक विदेशी मीडिया (BBC) की जांच रिपोर्ट के बाद की जा रही है, जिसमें दावा किया गया था कि इंस्टाग्राम और फेसबुक पर बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) से जुड़े कीवर्ड्स वाले विज्ञापन दिखाई दिए हैं। सरकार ने मेटा से पूछा है कि ऐसे संवेदनशील विज्ञापन उनके प्लेटफॉर्म पर लाइव कैसे हुए और इसे रोकने के लिए कंपनी क्या पुख्ता कदम उठा रही है।
