एएमसीए में स्वदेशी टाइटेनियम तकनीक, भारत का नया स्टील्थ लड़ाकू विमान बनेगा और ताकतवर

नई दिल्ली। भारत के महत्वाकांक्षी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) कार्यक्रम में स्वदेशी टाइटेनियम तकनीक के उपयोग पर जोर दिया जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हल्की और मजबूत टाइटेनियम संरचना के इस्तेमाल से यह पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान अधिक तेज, टिकाऊ और कम रडार सिग्नेचर वाला बनेगा। साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित रखरखाव प्रणाली और उन्नत सेंसर इसे भविष्य की हवाई लड़ाइयों के लिए और सक्षम बनाएंगे।

टाइटेनियम से हल्का और अधिक शक्तिशाली होगा विमान

रिपोर्टों के अनुसार, एएमसीए की संरचना और लैंडिंग गियर में टाइटेनियम के व्यापक उपयोग की योजना है। टाइटेनियम हल्का होने के साथ अत्यधिक मजबूत, जंगरोधी और उच्च तापमान सहने वाला धातु है। इससे विमान का वजन कम होगा, गति और ईंधन दक्षता बढ़ेगी तथा स्टील्थ क्षमता को भी मजबूती मिलेगी।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की डिफेंस मेटलर्जिकल रिसर्च लेबोरेटरी (डीएमआरएल) ने स्वदेशी बीटा टाइटेनियम मिश्रधातु विकसित की है, जिसका उपयोग एएमसीए परियोजना में किया जा सकता है। अनुमान है कि विमान का वजन 18 से 25 टन के बीच रखा जाएगा, जिससे इसकी मारक क्षमता और संचालन क्षमता में सुधार होगा।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित रखरखाव प्रणाली होगी खास

एएमसीए में इंटीग्रेटेड व्हीकल हेल्थ मैनेजमेंट सिस्टम (आईवीएचएम) और फ्लाइट डेटा मैनेजमेंट सिस्टम (एफडीएमएस) जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। डिजिटल ट्विन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से विमान उड़ान के दौरान ही अपने विभिन्न पुर्जों की स्थिति का विश्लेषण करेगा।

यदि किसी पुर्जे में खराबी के शुरुआती संकेत मिलते हैं तो प्रणाली पहले ही ग्राउंड क्रू को सूचना दे देगी, जिससे विमान के उतरने से पहले आवश्यक पुर्जे तैयार रखे जा सकेंगे। इससे रखरखाव का समय घटेगा और विमान अधिक समय तक मिशन के लिए उपलब्ध रहेगा।

स्टील्थ क्षमता और उपलब्धता पर विशेष ध्यान

एएमसीए के विकास में केवल रडार से बचने की क्षमता ही नहीं, बल्कि आसान रखरखाव और अधिक मिशन उपलब्धता पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। पश्चिमी देशों के कई स्टील्थ विमानों में जटिल रखरखाव और महंगी मरम्मत बड़ी चुनौती रही है। भारतीय परियोजना में ऐसी कमियों को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल फ्लीट प्रबंधन और आधुनिक रखरखाव प्रणाली के जरिए एएमसीए की मिशन उपलब्धता को लगभग 75 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

भारत की वायु शक्ति को मिलेगी नई मजबूती

भारतीय वायु सेना की घटती स्क्वाड्रन संख्या और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए एएमसीए परियोजना को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस परियोजना को वर्ष 2024 में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति से लगभग 15 हजार करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है। परियोजना का उद्देश्य पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित अत्याधुनिक स्टील्थ लड़ाकू विमान विकसित कर भारत की हवाई शक्ति को नई ऊंचाई देना है।

हालांकि एएमसीए अभी विकास के चरण में है। इसकी अंतिम तकनीकी क्षमता, प्रदर्शन और अन्य वैश्विक पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों से वास्तविक तुलना का आकलन विमान के परीक्षण और सेवा में शामिल होने के बाद ही संभव होगा।

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