नई दिल्ली। सावन से पहले जुलाई महीने का पहला प्रदोष व्रत 12 जुलाई, रविवार को रखा जाएगा। रविवार के दिन पड़ने के कारण इसे रवि प्रदोष व्रत कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने पर मनोकामनाएं पूरी होती हैं तथा सुख-समृद्धि और शांति का आशीर्वाद मिलता है।
प्रदोष व्रत का शुभ समय
पंचांग के अनुसार त्रयोदशी तिथि का आरंभ 11 जुलाई को रात्रि 2:05 बजे हुआ और इसका समापन 12 जुलाई को रात 10:31 बजे होगा। त्रयोदशी तिथि प्रदोष काल में रहने के कारण 12 जुलाई को रवि प्रदोष व्रत रखा जाएगा।
रवि प्रदोष व्रत की पूजा विधि
प्रदोष व्रत के दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करें। प्रदोष काल में भगवान शिव का जल, दूध या पंचामृत से अभिषेक करें। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, अक्षत, चंदन, पुष्प, शहद और माला अर्पित करें। घी का दीपक जलाकर प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें, भगवान शिव की आरती करें और भोग लगाकर व्रत का पारण करें।
रवि प्रदोष व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रवि प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है। शिव पुराण में वर्णित है कि श्रद्धा और भक्ति से प्रदोष काल में शिव पूजा करने से अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है। साथ ही परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है तथा भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
