अस्पतालों पर साइबर हमले का बढ़ा खतरा, आईसीयू मरीजों की जान पर पड़ सकता है असर: अध्ययन

नई दिल्ली। अस्पतालों में बढ़ती डिजिटल व्यवस्था के बीच साइबर हमलों का खतरा गंभीर होता जा रहा है। भारतीय शोधकर्ताओं के एक अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि यदि किसी अस्पताल का सिस्टम रैनसमवेयर जैसे साइबर हमले का शिकार हो जाए, तो आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों का इलाज बाधित हो सकता है और उनकी जान जोखिम में पड़ सकती है। यह अध्ययन जून 2026 में प्रकाशित इंडियन जर्नल ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है।

एम्स हमले से मिली बड़ी सीख

अध्ययन का नेतृत्व कोलकाता के पार्कव्यू सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डॉ. बोधिसत्व चौधुरी ने किया। इसमें रिम्स रांची, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी और ब्रिटेन के विशेषज्ञ भी शामिल रहे। शोधकर्ताओं ने 2022 में एम्स दिल्ली पर हुए रैनसमवेयर हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि इस घटना ने भारतीय अस्पतालों की साइबर सुरक्षा की कमजोरियों को उजागर किया।

आईसीयू सबसे अधिक संवेदनशील

अध्ययन के अनुसार, आईसीयू में मरीजों की निगरानी, दवा प्रबंधन, इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड और इंटरनेट से जुड़े चिकित्सा उपकरण पूरी तरह डिजिटल प्रणाली पर निर्भर हैं। ऐसे में साइबर हमले के कारण यदि सिस्टम ठप हो जाए तो इलाज प्रभावित हो सकता है और मरीजों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

अस्पतालों के लिए तीन अहम सुझाव

शोधकर्ताओं ने अस्पतालों के लिए तीन स्तर की तैयारी की सिफारिश की है। पहला, दवाओं का कागजी रिकॉर्ड, कर्मचारियों की स्पष्ट जिम्मेदारी और नियमित मॉक ड्रिल की व्यवस्था हो। दूसरा, सभी जरूरी डिजिटल सिस्टम का बैकअप और वैकल्पिक व्यवस्था तैयार रखी जाए। तीसरा, बड़े अस्पतालों में मजबूत साइबर सुरक्षा ढांचा और अतिरिक्त तकनीकी क्षमता विकसित की जाए।

तैयारी ही सबसे बड़ा बचाव

अध्ययन में कहा गया है कि डिजिटल सिस्टम फेल होने की स्थिति में मरीजों की सुरक्षा के लिए पहले से की गई तैयारी, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी और मजबूत ऑफलाइन व्यवस्था सबसे प्रभावी साबित होती है। इसलिए अस्पतालों में साइबर सुरक्षा को केवल सूचना प्रौद्योगिकी विभाग का विषय नहीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *