वॉशिंगटन/तेहरान। होर्मुज़ जलडमरूमध्य में एक वाणिज्यिक मालवाहक जहाज पर हमले के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने आरोप लगाया है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने कार्गो जहाज एम/वी जीएफएस गैलेक्सी पर हमला किया। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरान के खिलाफ इस सप्ताह तीसरे दौर की सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है।
जहाज को भारी नुकसान, चालक दल का सदस्य लापता
सेंटकॉम के अनुसार, हमले में जहाज के इंजन कक्ष को भारी नुकसान पहुंचा, उसमें आग लग गई और वह आगे बढ़ने में असमर्थ हो गया। घटना के बाद चालक दल का एक सदस्य लापता बताया गया है। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि जहाज पर उस समय मिसाइल दागी गई, जब वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजर रहा था।
ओमान में तनाव कम करने पर हुई बातचीत
घटना से पहले ट्रंप प्रशासन ने ईरान से होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही की सार्वजनिक गारंटी देने की मांग की थी। इसी बीच ओमान की राजधानी मस्कट में ईरान, ओमान और कतर के अधिकारियों के बीच क्षेत्रीय तनाव कम करने को लेकर बातचीत हुई। ओमान ने दोनों शिपिंग मार्गों को पूरी तरह खोलने का प्रस्ताव रखा, लेकिन ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने इस पर तत्काल सहमति नहीं दी।
आईआरजीसी ने दी अपनी सफाई
आईआरजीसी ने दावा किया कि उसने पहले ही कुछ जहाजों को कथित “अनधिकृत” मार्ग का इस्तेमाल नहीं करने की चेतावनी दी थी। संगठन का कहना है कि संबंधित जहाज ने चेतावनी की अनदेखी की, जिसके बाद केवल “चेतावनी के तौर पर गोली” चलाई गई।
आईआरजीसी ने यह भी घोषणा की कि अमेरिकी हस्तक्षेप समाप्त होने तक होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद रहेगा और किसी भी जहाज को वहां से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
अमेरिका ने बताई सैन्य कार्रवाई की वजह
सेंटकॉम ने कहा कि ईरान को समुद्री सुरक्षा से जुड़े अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन करने का अवसर दिया गया था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। अमेरिकी सेना के अनुसार, मौजूदा सैन्य अभियान का उद्देश्य ईरान की उन क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनका इस्तेमाल नागरिकों और वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों के लिए किया जाता है।
