पूर्णिया। भगवान जगन्नाथ की पावन रथयात्रा गुरुवार को पूर्णिया में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ निकाली गई। पूर्णिया सिटी स्थित प्राचीन भगवान जगन्नाथ मंदिर से निकली रथयात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के दर्शन किए। पूरे शहर में “जय जगन्नाथ”, “जय बलभद्र” और “जय सुभद्रा” के जयघोष गूंजते रहे।
400 वर्षों से निभाई जा रही परंपरा
बताया जाता है कि पूर्णिया में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा की परंपरा करीब 400 वर्षों से चली आ रही है। फूलों और आकर्षक वस्त्रों से सजे भव्य रथ पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमाएं विराजमान थीं। विधि-विधान से पूजा-अर्चना और आरती के बाद रथयात्रा नगर भ्रमण के लिए रवाना हुई।
रास्ते भर श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। जगह-जगह पुष्पवर्षा कर रथयात्रा का स्वागत किया गया तथा भक्तों के बीच प्रसाद और शीतल पेयजल का वितरण किया गया।
जनप्रतिनिधियों ने खींची रथ की रस्सी
रथयात्रा में बिहार सरकार की भवन निर्माण मंत्री लेशी सिंह, कसबा विधायक नितेश कुमार सिंह, विधान परिषद सदस्य अनिल ठाकुर, महापौर विभा कुमारी सहित कई जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। सभी ने भगवान जगन्नाथ के रथ की रस्सी खींचकर सेवा, समर्पण और आस्था का संदेश दिया। धार्मिक मान्यता है कि रथ की रस्सी खींचने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक
भवन निर्माण मंत्री लेशी सिंह ने कहा कि पूर्णिया की रथयात्रा जिले की गौरवशाली धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। उन्होंने भगवान जगन्नाथ से प्रदेश में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। वहीं, विधायक नितेश कुमार सिंह ने कहा कि ऐसी धार्मिक परंपराएं समाज में प्रेम, एकता और सद्भाव को मजबूत करती हैं।
मंदिर के पुजारी आशुतोष ने बताया कि पूर्णिया का भगवान जगन्नाथ मंदिर अत्यंत प्राचीन है और पुरी की परंपरा के अनुरूप यहां हर वर्ष रथयात्रा निकाली जाती है। उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ की सच्चे मन से आराधना करने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

