नई दिल्ली। कारगिल विजय दिवस के अवसर पर पूरे देश ने आज कारगिल युद्ध के वीर शहीदों और बहादुर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह एवं सहकारितामंत्री अमित शाह और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भारतीय सशस्त्र बलों के शौर्य, बलिदान और राष्ट्रभक्ति को नमन किया।
द्रास में आयोजित हुआ मुख्य समारोह
इस वर्ष कारगिल विजय दिवस का मुख्य कार्यक्रम नई दिल्ली के बजाय लद्दाख के द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मारक पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम की पूर्व संध्या पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह द्रास पहुंचे और कारगिल युद्ध में शहीद हुए वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने किया वीरों का सम्मान
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि कारगिल के वीर योद्धाओं का अद्वितीय पराक्रम, अडिग संकल्प और राष्ट्रभक्ति भारतीय सेना की गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि देश सदैव उनके बलिदान का ऋणी रहेगा और उनकी शौर्यगाथा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि कारगिल विजय दिवस पर पूरा देश भारत की सुरक्षा के लिए बहादुर सैनिकों के असाधारण साहस और समर्पण को नमन करता है। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी सैनिकों का अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा हमेशा देश को प्रेरित करती रहेगी।
अमित शाह और उपराष्ट्रपति ने भी दी श्रद्धांजलि
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कारगिल युद्ध में वीर सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान को देश की संप्रभुता और अखंडता की रक्षा का प्रतीक बताया। वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि कारगिल विजय दिवस भारतीय सेना के अदम्य शौर्य और पराक्रम का प्रतीक है। उन्होंने ऑपरेशन विजय के दौरान बलिदान देने वाले सभी वीर सपूतों को नमन किया।
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी शहीदों और उनके परिवारों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि उनका त्याग राष्ट्र के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगा।
60 दिनों तक चला था कारगिल युद्ध
कारगिल युद्ध मई 1999 से 26 जुलाई 1999 तक लगभग 60 दिनों तक चला। पाकिस्तान की घुसपैठ के बाद भारतीय थल सेना ने ऑपरेशन विजय और भारतीय वायु सेना ने ऑपरेशन सफेद सागर चलाया। दुर्गम पहाड़ियों और अत्यंत प्रतिकूल परिस्थितियों में भारतीय सैनिकों ने तोलोलिंग, टाइगर हिल और प्वाइंट 4875 जैसी रणनीतिक चोटियों पर दोबारा कब्जा कर 26 जुलाई 1999 को ऐतिहासिक विजय हासिल की। इसी गौरवपूर्ण जीत की स्मृति में हर वर्ष 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है।


