औरैया। उत्तर प्रदेश के औरैया जनपद में शहर से लगभग चार किलोमीटर दक्षिण यमुना तट के बीहड़ क्षेत्र में स्थित प्राचीन देवकली मंदिर धार्मिक आस्था और लोकमान्यताओं का प्रमुख केंद्र माना जाता है। सावन माह में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान महाकालेश्वर का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं और मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं।
राजा कृष्णदेव से जुड़ी है स्थापना की जनश्रुति
मंदिर के पुजारी शिव के अनुसार, प्राचीन काल में इस स्थान को देवगढ़ के नाम से जाना जाता था। जनश्रुति है कि राजा कृष्णदेव ने यमुना तट पर किला और भगवान महाकालेश्वर का मंदिर बनवाकर शिवलिंग की स्थापना कराई थी। समय के साथ किला नष्ट हो गया और क्षेत्र वीरान हो गया।
देवकला के नाम पर पड़ा मंदिर का नाम
लोकमान्यता के अनुसार, कई पीढ़ियों बाद राजा विशोक देव और उनकी पत्नी देवकला संतान प्राप्ति की कामना लेकर यहां पहुंचे। महल की नींव खोदते समय आंगन के बीच एक प्राचीन शिवलिंग मिला, जिसे हटाया नहीं जा सका। कहा जाता है कि महारानी देवकला को माता मंगला काली ने स्वप्न में दर्शन देकर बताया कि यह स्वयं महाकालेश्वर हैं। इसके बाद राजा ने उसी स्थान पर भव्य शिव मंदिर का निर्माण कराया। मंदिर पूर्ण होने से पहले महारानी देवकला का निधन हो गया, जिसके बाद उनकी स्मृति में मंदिर का नाम ‘देवकली मंदिर’ रखा गया।
सावन सोमवार को लगता है विशाल मेला
मंदिर से जुड़ी एक अन्य जनश्रुति में शेरशाह सूरी द्वारा मंदिर पर आक्रमण और एक गुंबद को क्षति पहुंचाने का उल्लेख मिलता है। हालांकि इसके ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन यह कथा आज भी स्थानीय लोगों में प्रचलित है।
सावन के प्रत्येक सोमवार को देवकली मंदिर में विशाल मेला लगता है, जहां औरैया समेत आसपास के जिलों से हजारों श्रद्धालु दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। पुजारी शिव का कहना है कि यह प्राचीन सिद्धपीठ धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है और इसके इतिहास पर अभी और शोध की आवश्यकता है।


