मैड्रिड। स्पेन के स्वायत्त क्षेत्र स्यूटा में बढ़े प्रवासी संकट के बाद हालात धीरे-धीरे सामान्य होने लगे हैं। स्पेन सरकार के अनुसार, सीमा पार कर स्यूटा पहुंचे करीब 60 हजार प्रवासियों में से 48,300 से अधिक लोग अपनी इच्छा से मोरक्को लौट चुके हैं।
सीमा पर तनाव के बाद हालात काबू में
स्पेन के गृह मंत्रालय के मुताबिक, बड़ी संख्या में प्रवासी जमीन और समुद्र के रास्ते स्यूटा पहुंचे थे, जिससे क्षेत्र में अफरा-तफरी और मानवीय संकट जैसी स्थिति पैदा हो गई थी।
स्थिति नियंत्रित करने के लिए मोरक्को के सुरक्षा बलों ने सीमा पर कार्रवाई की और नए प्रवासियों को प्रवेश करने से रोकने की कोशिश की। इस दौरान लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की भी जानकारी सामने आई।
यूरोपीय देशों में बढ़ी चिंता
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने स्यूटा की स्थिति को “अस्वीकार्य” बताते हुए कहा कि यूरोपीय संघ में नियमों का पालन किए बिना प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा सकती।
वहीं, इटली ने स्पेन को शेंगेन मुक्त आवाजाही क्षेत्र से निलंबित करने की मांग की। बाद में फिनलैंड और डेनमार्क ने भी इस मांग का समर्थन किया। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने मोरक्को से अवैध प्रवासियों को तुरंत वापस लेने की अपील की।
फ्रांस और ब्रिटेन ने संकट से निपटने में स्पेन की मदद की पेशकश की है। फ्रांस ने स्पेन से लगी सीमा पर सुरक्षा जांच भी बढ़ा दी है।
ट्रंप ने स्पेन की नीतियों पर उठाए सवाल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्यूटा प्रवासी संकट को लेकर स्पेन सरकार पर निशाना साधा। कैंप डेविड में कैबिनेट बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि स्यूटा में बने हालात अनियंत्रित प्रवासन के खतरे को दिखाते हैं।
ट्रंप ने कहा कि स्पेन में जिस तरह के हालात दिखे, ऐसा लगा जैसे लाखों लोग किसी देश पर हमला कर रहे हों। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सही नीतियां नहीं अपनाई गईं तो अमेरिका में भी इससे बड़े संकट पैदा हो सकते हैं।
अमेरिकी विदेश विभाग ने भी बयान जारी कर स्पेन सरकार पर यूरोप में बड़े पैमाने पर अवैध प्रवासन को बढ़ावा देने का आरोप लगाया और कहा कि अमेरिका अपने सहयोगियों के साथ आगे के कदमों पर विचार कर रहा है।
दक्षिणपंथी नेताओं ने भी जताई चिंता
यूरोप के कई दक्षिणपंथी नेताओं ने भी स्यूटा संकट को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। जर्मनी की अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (एएफडी) पार्टी की सह-नेता ऐलिस वाइडेल ने इसे पूरे यूरोप के लिए चुनौती बताया।
इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी और चेक गणराज्य के प्रधानमंत्री आंद्रेज बाबिस ने भी स्पेन की आव्रजन नीति पर सवाल उठाए हैं।
हालांकि, स्पेन सरकार का कहना है कि स्थिति अब तेजी से सामान्य हो रही है और बड़ी संख्या में प्रवासी स्वेच्छा से मोरक्को लौट चुके हैं। सरकार ने आरोप लगाया कि कुछ देश इस मानवीय संकट का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं।


