काठमांडू। हिंदू संगठनों के आंदोलन के बाद नेपाल सरकार ने कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर समझौता किया है। धनुषा के प्रमुख जिलाधिकारी प्रेम प्रसाद लुइटेल के अनुसार, समझौते में नेपाल को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करने, धार्मिक स्थलों की निगरानी, विदेशी फंडिंग की जांच और धार्मिक सद्भाव बनाए रखने जैसे मुद्दे शामिल हैं।
हिंदू राष्ट्र पर शुरू होगी राजनीतिक चर्चा
समझौते के तहत सरकार तीन महीने के भीतर नेपाल को हिंदू राष्ट्र घोषित करने के मुद्दे पर सर्वदलीय और सर्वपक्षीय चर्चा शुरू करेगी। इसके साथ ही इस संबंध में आवश्यक संवैधानिक और राजनीतिक प्रक्रिया आगे बढ़ाने की पहल की जाएगी। हिंदू संगठन लंबे समय से नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग करते रहे हैं।
धार्मिक स्थलों और फंडिंग की होगी जांच
समझौते में धार्मिक जुलूसों के दौरान हथियारों के प्रदर्शन पर रोक लगाने का फैसला भी शामिल है। मुहर्रम समेत अन्य धार्मिक जुलूसों में हथियारों के प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है, ताकि कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखा जा सके।
इसके अलावा मस्जिद, मदरसा, चर्च, गुम्बा और अन्य धार्मिक स्थलों पर लगाए गए लाउडस्पीकर के उपयोग को नियंत्रित करने पर सहमति बनी है। इन्हें केवल संबंधित परिसर की सीमा तक सुनाई देने की अनुमति होगी।
सरकार ने धार्मिक स्थलों में रहने वाले लोगों की पहचान दर्ज करने और उनका अभिलेख तैयार करने का भी निर्णय लिया है। साथ ही विदेशी नागरिकों की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने की बात कही गई है।
विदेशी सहायता और नागरिकता की होगी समीक्षा
समझौते के अनुसार, मस्जिदों और मदरसों को मिलने वाली आर्थिक सहायता तथा विदेशी फंडिंग की जांच की जाएगी। वर्ष 2006-07 के बाद जारी की गई नेपाली नागरिकताओं की वैधानिकता की समीक्षा का भी प्रावधान रखा गया है।
सरकार ने मुस्लिम आयोग की आवश्यकता और औचित्य का पुनर्मूल्यांकन करने पर भी सहमति जताई है। समीक्षा में आवश्यकता नहीं पाए जाने पर इसे समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
इसके अलावा धार्मिक सद्भाव बिगाड़ने के उद्देश्य से सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर भी कड़ी कानूनी कार्रवाई करने का फैसला लिया गया है। हालांकि, सरकार की ओर से समझौते के क्रियान्वयन और समयसीमा को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी अभी जारी नहीं की गई है।


