श्री विजयपुरम (पोर्ट ब्लेयर)। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने रविवार को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान की शुरुआत करते हुए कहा कि भारत की शांति और उदारता को उसकी कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। उन्होंने नागरिकों से राष्ट्रीय हितों और संप्रभुता की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तिरंगे से प्रेरणा लेकर साहस, एकता और आशा का संचार करें तथा मजबूत एवं विकसित भारत के निर्माण में स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत को आगे बढ़ाएं।
उपराष्ट्रपति ने अंडमान-निकोबार द्वीप समूह की राजधानी श्री विजयपुरम के ऐतिहासिक फ्लैग प्वाइंट पर राष्ट्रीय ध्वज फहराकर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान की शुरुआत की। इसी ऐतिहासिक स्थल पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने 30 दिसंबर 1943 को तिरंगा फहराया था।
‘हर घर तिरंगा’ को बताया राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन
उपराष्ट्रपति ने अभियान के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किया गया ‘हर घर तिरंगा’ अभियान अब राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन बन चुका है। उन्होंने प्रत्येक नागरिक से तिरंगे को गर्व के साथ फहराने और देशभक्ति, एकता तथा सामूहिक जिम्मेदारी के मूल्यों को आत्मसात करने की अपील की।
महान तमिल कवि सुब्रमण्यम भारती के अमर शब्दों को याद करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि भारती द्वारा मनाया जाने वाला ‘मणि कोडी’ उत्सव भारतीय भावना के शाश्वत साहस और भारत माता के ध्वज की महिमा को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि ‘हर घर तिरंगा’ अभियान इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए सभी नागरिकों को एक राष्ट्रीय ध्वज, एक मातृभूमि और साझा भविष्य के तहत एकजुट करता है।
बलिदानों की पवित्र भूमि है अंडमान-निकोबार
राधाकृष्णन ने कहा कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह भारत का केवल भौगोलिक हिस्सा नहीं, बल्कि बलिदानों की पवित्र भूमि है। उन्होंने वीर सावरकर और सेलुलर जेल में कैद रहे अनगिनत देशभक्तों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि इन स्वतंत्रता सेनानियों का साहस, देशभक्ति और बलिदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
उन्होंने कहा कि अंडमान-निकोबार के सभी द्वीप ‘विविधता में एकता’ और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के जीवंत उदाहरण हैं। यहां समृद्ध आदिवासी विरासत के साथ संपर्क व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में भी प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि ग्रेट निकोबार द्वीप विकास परियोजना भारत की समुद्री क्षमताओं, संपर्क व्यवस्था और आर्थिक अवसरों को और मजबूत करेगी। इसके साथ ही विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
उदारता को कमजोरी न समझें
भारत की शांति और उदारता की परंपरा के साथ राष्ट्रीय शक्ति की आवश्यकता पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत हमेशा से उदार रहा है, लेकिन उसकी उदारता को कभी कमजोरी नहीं समझना चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया और ‘हर घर तिरंगा’ प्रदर्शनी का दौरा किया। कार्यक्रम में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल एडमिरल डीके जोशी (सेवानिवृत्त), मुख्य सचिव चंचल यादव, विजयपुरम नगर परिषद की अध्यक्ष एम. वसंत और जिला परिषद के अध्यक्ष पी. उमर सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।


