HomeBreaking Newsकैग रिपोर्ट: झारखंड में मनरेगा, पीएम आवास और जल जीवन मिशन के...

कैग रिपोर्ट: झारखंड में मनरेगा, पीएम आवास और जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन में गंभीर गड़बड़ियां

रांची। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने झारखंड में मनरेगा, जल जीवन मिशन और प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के क्रियान्वयन में गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं पर आपत्ति जताई है। वर्ष 2019 से 2024 के दौरान योजनाओं के संचालन की समीक्षा के आधार पर तैयार रिपोर्ट विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किए जाने के बाद सार्वजनिक की गई। प्रधान महालेखाकार इंदु अग्रवाल ने रिपोर्ट जारी करते हुए योजनाओं के क्रियान्वयन, वित्तीय प्रबंधन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में कई कमियां सामने आने की जानकारी दी।

मनरेगा मजदूरों की राशि वाहनों के रखरखाव पर खर्च

कैग रिपोर्ट के अनुसार, मनरेगा के नरेगासॉफ्ट पोर्टल और विभागीय वित्तीय अभिलेखों में विसंगतियां पाई गईं। गिरिडीह, गुमला और पाकुड़ जिलों में मनरेगा मजदूरों की मजदूरी मद से 32.62 लाख रुपये पुराने सरकारी वाहनों के रखरखाव पर खर्च कर दिए गए। इसके अलावा वर्ष 2019 से 2024 के दौरान अकुशल श्रमिकों की 321.84 करोड़ रुपये की मजदूरी मार्च 2025 तक भी लंबित रही। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 1.02 करोड़ से अधिक प्रस्तावित कार्यों में से केवल लगभग 27 प्रतिशत कार्य ही पूरे हो सके।

जल जीवन मिशन लक्ष्य से काफी पीछे

जल जीवन मिशन की समीक्षा में भी कैग ने गंभीर कमियां दर्ज की हैं। राज्य सरकार ने 98,067 योजनाओं को मंजूरी दी थी, लेकिन दिसंबर 2024 तक केवल 27,249 योजनाएं, यानी करीब 28 प्रतिशत, पूरी हो सकीं। सहायता गतिविधियों पर केंद्रीय हिस्से का केवल 1.41 प्रतिशत और जल गुणवत्ता निगरानी पर मात्र 0.85 प्रतिशत राशि खर्च की गई, जबकि निर्धारित मानदंड क्रमशः पांच और दो प्रतिशत थे। अगस्त 2019 में जहां 3.45 लाख परिवारों तक नल जल योजना पहुंची थी, वहीं मार्च 2025 तक यह संख्या बढ़कर 34.31 लाख हुई, लेकिन हजारों गांव अब भी योजना से वंचित रहे।

पीएम आवास योजना में लाभुक चयन पर सवाल

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत लाभार्थियों के चयन में भी अनियमितताएं सामने आईं। कैग के अनुसार, ग्राम सभाओं और जिला स्तरीय समितियों द्वारा सत्यापन की प्रक्रिया सही ढंग से नहीं अपनाई गई, जिसके कारण 2.90 लाख ऐसे लाभार्थी सूची में शामिल हो गए जिन्हें बाद में हटाना पड़ा। छह जिलों की 60 ग्राम पंचायतों में किए गए भौतिक सत्यापन में यह गड़बड़ी सामने आई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि योग्य परिवारों की पहचान होने के बावजूद आवंटन में देरी के कारण लगभग 6.32 लाख पात्र परिवार योजना का लाभ नहीं ले सके।

राजस्व संग्रह में वृद्धि, लेकिन योजनाओं पर सवाल कायम

रिपोर्ट में राज्य के कर और गैर-कर राजस्व में वृद्धि का उल्लेख किया गया है। कर राजस्व 2019-20 के 16,771.45 करोड़ रुपये से बढ़कर 2023-24 में 28,004.76 करोड़ रुपये पहुंच गया। गैर-कर राजस्व भी 8,749.98 करोड़ रुपये से बढ़कर 13,425.14 करोड़ रुपये हो गया। वर्ष 2024-25 में राज्य की सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर 10.87 प्रतिशत दर्ज की गई, लेकिन कैग ने स्पष्ट किया कि प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में प्रशासनिक सुधार और प्रभावी निगरानी की आवश्यकता बनी हुई है।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments