नई दिल्ली। राज्यसभा ने सोमवार को बैंकर्स बुक्स एविडेंस विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों के सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया। इससे पहले यह विधेयक लोकसभा से भी मंजूरी प्राप्त कर चुका है।
विपक्ष के बहिर्गमन पर वित्त मंत्री की प्रतिक्रिया
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विपक्ष के बहिर्गमन को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इतने महत्वपूर्ण सुधारवादी विधेयक पर चर्चा में सभी दलों की भागीदारी होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक काल के कानूनों में बदलाव समय की आवश्यकता है, क्योंकि वे ब्रिटिश शासन के दौर की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाए गए थे।
135 साल पुराने कानून की जगह लेगा नया विधेयक
वित्त मंत्री ने बताया कि मौजूदा बैंकर्स बुक्स एविडेंस कानून वर्ष 1891 में बनाया गया था, जब बैंकिंग व्यवस्था पूरी तरह कागजी रिकॉर्ड पर आधारित थी। आज बैंकिंग प्रणाली में इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और क्लाउड आधारित रिकॉर्ड का व्यापक उपयोग हो रहा है। इसलिए पुराने कानून को वर्तमान डिजिटल बैंकिंग व्यवस्था के अनुरूप बनाना आवश्यक हो गया था।
उन्होंने कहा कि भारत ने डिजिटल अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में तेजी से प्रगति की है और नए विधेयक से बैंकिंग रिकॉर्ड से जुड़े साक्ष्यों को आधुनिक स्वरूप मिलेगा। चर्चा के बाद राज्यसभा ने विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया।
डिजिटल और क्लाउड रिकॉर्ड भी होंगे वैध साक्ष्य
यह विधेयक 5 अगस्त को लोकसभा से पारित हो चुका था। नया कानून 135 वर्ष पुराने बैंकर्स बुक्स एविडेंस अधिनियम, 1891 का स्थान लेगा। इसके लागू होने के बाद अदालतों में बैंकिंग के डिजिटल, वर्चुअल और क्लाउड आधारित रिकॉर्ड को भी वैध साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया जा सकेगा।


