पूरी तरह दिवालिये की तरफ बढ़ रहा है बिहार: अजीत शर्मा

भागलपुर बीते मंगलवार को बिहार विधानसभा में राज्य के वित्त मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव के द्वारा पेश बजट भाषण अबतक के इतिहास का सबसे संक्षिप्त भाषण था। बजट में निर्धारित आय और व्यय में विगत कई वर्षों से भारी असमानता दिखाई पड रही है। राज्य को प्राप्त कुल राजस्व और व्यय की असमानता यह बताता है कि बिहार का बजट सरकार द्वारा निर्धारित अनुमान से कहीं ज्यादा रहा है। अगर हम राज्य कोषीय घाटा पर ध्यान दें तो राज्य पूरी तरह दिवालिये की तरफ बढ़ रहा है। भागलपुर के पूर्व विधायक अजीत शर्मा ने बिहार के आम बजट पर उपरोक्त प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए बुधवार को कहा कि बिहार सरकार का बजट सिस्टम फेल है। एक वर्ष का बजट भी सही नहीं बनता। अगर एक लाइन में कहें तो यह लोगों को बरगलाने वाला बजट है। जो तीन वर्षों के बजट का मिलान करने से स्पष्ट हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि 2024-25 के बजट में कुल व्यय लगभग 2.79 लाख करोड़ रुपये अनुमानित था जो पुनरीक्षित होकर 3 लाख 49 हजार 817 करोड़ हुआ, जिसमें राजकोषीय घाटा शुरुआत में 3% के आसपास रखने का दावा किया गया था। लेकिन संशोधित होकर यह घाटा बढ़कर 82 हजार 477 करोड़ पहुंच गया जो लगभग 9% रहा यानी सरकार घाटा को नियंत्रित नहीं कर सकी। 2025-26 में बजट का आकार 3.17 लाख करोड़ रुपये रखा गया जो पुनरीक्षित होकर 4 लाख 23 हजार 284 करोड़ का हो गया। राजकोषीय घाटा 3% (32,718 करोड़) का लक्ष्य रखा गया लेकिन यह बढ़ कर 01 लाख 34 हजार 371 करोड़ रुपए जो गए। यह चुनावी बजट घोषित हुआ राजकोषीय घाटा 25 प्रतिशत तक पहुंच गया। 2026-27 का कुल व्यय का बजट 3 लाख 53 हजार 45 करोड़ का है जिसमें राजस्व व्यय 2,84,133 करोड़ – यानी लगभग सारा राजस्व व्यय में चला गया, विकास के लिए कुछ नहीं बचा। पूँजीगत व्यय सिर्फ 63,455 करोड़ – जो कुल बजट का महज 18% है। विकास कार्यों के लिए नगण्य। राजकोषीय घाटा: 39,111 करोड़ (या लगभग 39,400 करोड़) – 2.99% GSDP का दावा, लेकिन पिछले पैटर्न से पता चलता है कि यह बढ़कर 15- 20 प्रतिशत हो सकता है क्योंकि पिछले वर्ष 1.34 लाख करोड़ का घाटा था। यह बजट विकास का नहीं, घाटे का बजट है।

बजट को देखने से पता चलता है कि सरकार हर साल पूँजीगत व्यय को बढ़ाने का दावा करती है, लेकिन वास्तव में राजस्व व्यय (वेतन, पेंशन, सब्सिडी) में फँसी हुई है। बिहार की अपनी राजस्व क्षमता कमजोर है। टैक्स कलेक्शन बहुत ही कम है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में केंद्र से सहायक अनुदान घटाया गया है (54,757 से 51,895 करोड़) जबकि दोनों जगह एनडीए की सरकार यानी डबल इंजन की सरकार है। पूरे बजट की एक ही कहानी है केंद्र पर निर्भरता। 80% से अधिक केंद्र सरकार पर निर्भरता है।‌अपनी कमाई सिर्फ 20% के आसपास

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