रांची। पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद महतो ने कहा है कि केंद्र प्रायोजित जल जीवन मिशन (जेजेएम) जैसी व्यापक एवं महत्वाकांक्षी योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार के बीच वित्तीय सहयोग की निरंतरता अत्यंत आवश्यक है। केंद्र सरकार से झारखंड का करीब ₹6,270 करोड़ रुपये अभी लंबित है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के मार्गदर्शन में झारखंड जल जीवन मिशन को जनसहभागिता, पारदर्शिता और दीर्घकालिक स्थायित्व के साथ लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। केंद्र सरकार के सहयोग से हम प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक सुरक्षित एवं सतत पेयजल पहुंचाने के लक्ष्य को शीघ्र प्राप्त करेंगे। उन्होंने केंद्रीय अंश के बकाया 6207 करोड़ रुपये की राशि देने का हाथ जोड़ कर अनुरोध किया।
यह बातें योगेंद्र ने मंगलवार को नई दिल्ली के आईसीआर-पूसा में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में कहीं। यह कार्यशाला नेशनल वर्कशॉप ऑन पॉलिसी डायलॉग ऑन ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस (ओएंडएम) ऑफ रूरल वाटर सप्लाई इंफ्रास्ट्रक्चर नाम से हुआ। राष्ट्रीय कार्यशाला में नीति, उपलब्धि और भविष्य की रणनीति पर विस्तृत संवाद हुआ।
केंद्रीय मंत्रियों सहित कई राज्यों के मंत्री रहे मौजूद: कार्यशाला में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह, जल शक्ति मंत्रालय के राज्य मंत्री वी.सोमन्ना सहित विभिन्न राज्यों के उपमुख्यमंत्री, पेयजल एवं स्वच्छता तथा पंचायत राज विभाग के मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। झारखंड की ओर से विभागीय मंत्री के अलावा विभाग के अपर मुख्य सचिव मस्तराम मीणा एवं जल जीवन मिशन के मिशन डायरेक्टर रमेश घोलप ने भाग लिया। विभागीय मंत्री ने जल जीवन मिशन के अंतर्गत झारखंड में योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रगति, उपलब्धियों एवं चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए योजनाओं को समयबद्ध पूर्ण करने हेतु आवश्यक सहयोग पर अपना पक्ष रखा।
97,535 ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं का किया जा रहा क्रियान्वयन
पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद महतो ने बताया कि केंद्र प्रायोजित जल जीवन मिशन के तहत राज्य में कुल 97,535 ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसके माध्यम से 62.53 लाख ग्रामीण परिवारों को घरेलू नल जल कनेक्शन के जरिए शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित है। राज्य में अब तक 56,474 योजनाएं भौतिक रूप से पूर्ण हो चुकी हैं। लगभग 55 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों को एफएचटीसी से आच्छादित किया जा चुका है।
